
सुल्तानगंज गैंगवार: Bihar Mafia: बिहार में अपराधियों की अब खैर नहीं! नई सरकार ने भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कमर कस ली है। सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हो गई है, जिसमें करोड़ों की संपत्ति जब्त की जा रही है और बुलडोजर चलने की तैयारी है। मगर कई सवाल है। सड़े सिस्टम को पोजिशन पर लाना है। कब तक खगड़िया के युवक की दिल्ली में पुलिस के हाथों हत्या में जंगलराज को याद करते रहेंगे चिराग पासवान। या लोग मरते रहते हैं कहते मांझी तेजस्वी को घेरेंगे। बीस साल मायने रखता है। अब ताजा सुल्तानगंज में हालिया वारदात उसी श्राद्ध की ताकीद करते हैं जिसे मार डाला गया है। आप वर्तमान की कमी भूत काल की कमियों पर लटकी दुपट्टे से नहीं ढक सकते।
देवघर बाबाधाम की कांवड़ यात्रा के केंद्र सुल्तानगंज गंगा घाट पर होने वाली अवैध कमाई और आपराधिक वर्चस्व की गहरी लड़ाई कोई आज अचानक उपज में नहीं आया। ये कण गोजर अरसे से रेंग रहे। मगर धनी और कनबुच्चा जैसे कईं हैं जो अवैध सिस्टेमेटिक तरीके से चल रहे सिस्टम को रखैल बनाए हुए है। सिस्टम उनके सामने नतमस्तक है। उस खूंटी से बधाई पा रहा जिसके बिना सत्ता की एक सीढ़ी चढ़ना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन है। तो क्या माना जाए नई सम्राट सरकार कुछ नया लकीर खींच पाएगी या खाई की गहराई पाटन असंभव है।
सत्ता संभालते ही नई नीतीश कुमार सरकार ने बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया था। तत्कालीन गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराध के खिलाफ बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अब बिहार में न तो अपराधियों की दादागिरी चलेगी और न ही सिस्टम की ढिलाई। इसी कड़ी में 400 बड़े अपराधियों की सूची तैयार की गई थी जिनकी संपत्ति जब्त करने की योजना थी। हाल ही में, गोपालगंज पुलिस ने भू-माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करते हुए 60 कुख्यात अपराधियों की लिस्ट बनाई है। इन अपराधियों की अवैध संपत्तियों की जांच कर उन्हें जब्त करने की तैयारी चल रही है। इस कार्रवाई से जिले में संगठित अपराध और जमीन कब्जा करने वाले गिरोहों पर सख्त प्रहार होने की उम्मीद है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
Bihar Land Mafia पर आर्थिक अपराध इकाई की नज़र
गत दिसंबर में बिहार के गृह विभाग ने सूबे में सक्रिय 20 भू-माफियाओं और बालू माफियाओं की एक विशेष सूची तैयार की थी। इस सूची को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सख्त कार्रवाई और उनकी अवैध संपत्ति जब्त करने के लिए सौंपा गया। सरकार ने इन चिन्हित माफियाओं की करीब 55 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति कुर्क करने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने बताया कि राज्य में 400 अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के बाद अब 1200 से 1300 अपराधियों की एक नई सूची तैयार की गई है, जिनकी अवैध संपत्ति भी जब्त की जाएगी। यह दर्शाता है कि सरकार बड़े पैमाने पर अपराध के खिलाफ अभियान चला रही है। मगर इन सबके बीच सत्ता और अपराध गठजोड़ में बैठे कणगोजर का क्या होगा?
सुल्तानगंज में कार्यपालक अधिकारी (EO) कृष्ण भूषण की निर्मम हत्या ने देवघर बाबाधाम की कांवड़ यात्रा के केंद्र सुल्तानगंज गंगा घाट पर होने वाली अवैध कमाई और आपराधिक वर्चस्व की गहरी लड़ाई को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सालों से जारी दो खूंखार गिरोहों के बीच खूनी अदावत का नतीजा है, जिसने एक ईमानदार अधिकारी की जान ले ली।
सुल्तानगंज गैंगवार: रामधनी यादव और कनबुच्चा यादव: अपराध और राजनीति का गठजोड़
सुल्तानगंज नगर परिषद में लंबे समय से अवैध वसूली, बस स्टैंड और पार्किंग ठेकों से होने वाले अवैध धन को लेकर स्थानीय माफिया रामधनी यादव और रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा यादव गिरोह के बीच वर्चस्व की जंग चल रही थी। इन दोनों माफियाओं ने अपराध के साथ-साथ राजनीति में भी अपने पैर जमा रखे थे। रामधनी यादव की पत्नी नीलम देवी नगर परिषद की सभापति रह चुकी हैं और वर्तमान में उपसभापति हैं। वहीं, कनबुच्चा की पत्नी दयावती देवी भी दो बार नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं, जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाकर नीलम देवी ने पद से हटाया था। वर्तमान सभापति राज कुमार गुड्डू को कनबुच्चा यादव का समर्थन प्राप्त है, जिसके कारण रामधनी की अदावत अब राज कुमार गुड्डू से भी बढ़ गई थी।
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करोड़ों की जमीन और अवैध वसूली: झगड़े की मुख्य वजह
ईओ कृष्ण भूषण की हत्या के बाद पुलिस की सख्ती से रामधनी यादव मुठभेड़ में मारा गया, लेकिन इस खूनी संघर्ष की जड़ें बहुत गहरी हैं। सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ ट्रस्ट की लगभग 50 एकड़ जमीन, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, पर रामधनी यादव का वर्षों से अवैध कब्जा था। रंजीत यादव उर्फ कनबुच्चा भी इसी जमीन पर अपना हक जमाना चाहता था, जो उनकी दुश्मनी की एक बड़ी वजह रही। इसके अलावा, गंगा घाट पर लगने वाली दुकानों से ‘बट्टी’ (अवैध वसूली) भी इन दोनों के बीच झगड़े का मुख्य कारण रही है। दोनों अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में वसूली करते थे। रामधनी यादव की एक बड़ी अवैध कमाई गंगा से बालू के अवैध खनन से भी आती थी, जिसमें हर ट्रैक्टर से 500 रुपये की वसूली होती थी।
क्यों हुई EO कृष्ण भूषण की हत्या?
पिछले कुछ समय से राज कुमार गुड्डू और कनबुच्चा यादव के हाथ मिलाने से रामधनी यादव के धन पर भारी चोट पहुँच रही थी। दो साल से ठेका-पट्टा भी रामधनी के विरोधियों को मिलने लगा था। श्रावणी मेला सहित अन्य ठेकों से राज कुमार गुड्डू के समर्थकों को करोड़ों रुपये का लाभ प्राप्त होने लगा, जिससे उनका राजनीतिक कद भी बढ़ा और वे इलाके में भाजपा का चेहरा बन गए। रामधनी यादव को यह लगने लगा था कि राज कुमार गुड्डू के रहते उनकी कमाई मुश्किल है और उनकी पत्नी का नगर परिषद अध्यक्ष बनना भी नामुमकिन। अपने आपराधिक साम्राज्य को बचाने के लिए रामधनी यादव ने राज कुमार गुड्डू को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इसी क्रम में उन्होंने नगर परिषद कार्यालय पर हमला बोला, जहां दुर्भाग्यवश अपराधियों से भिड़ते हुए ईओ कृष्ण भूषण की गोली लगने से मौत हो गई। आज रामधनी यादव का एनकाउंटर पुलिस ने कर दिया है, जिससे सुल्तानगंज गैंगवार में फिलहाल कनबुच्चा यादव का एकछत्र राज कायम होता दिख रहा है।
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