ड्रग्स तस्करी: बिहार के पूर्णिया जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सार्वजनिक बस का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे दो ड्रग तस्करों को 72.50 ग्राम हेरोइन के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक महिला भी शामिल है।
बुधवार देर रात डगरूआ थाना पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर बरसौनी टोल प्लाजा के पास यह कार्रवाई की। पकड़े गए तस्करों की पहचान वैशाली निवासी ममता देवी और मनीष कुमार के रूप में हुई है, जो असम के रास्ते त्रिपुरा से हेरोइन लाकर बिहार के ग्रामीण इलाकों में बेचते थे।
टोल प्लाजा पर ऐसे बिछाया गया पुलिस का जाल
डगरूआ थाना के अपर थानाध्यक्ष दीपक कुमार गौतम को रात की गश्ती के दौरान सटीक सूचना मिली थी कि पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से एक यात्री बस में ड्रग्स की बड़ी खेप पूर्णिया की तरफ लाई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम अलर्ट हो गई और रणनीति बनाकर एनएच-31 स्थित बरसौनी टोल प्लाजा पर सघन वाहन जांच अभियान शुरू कर दिया। पुलिस ने टोल प्लाजा पर आने वाली हर गाड़ी पर पैनी नजर रखी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जैसे ही सिलीगुड़ी से आ रही संदिग्ध बस टोल प्लाजा पर रुकी, पुलिस बल ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
पुलिस टीम जब बस के भीतर दाखिल हुई और यात्रियों की जांच शुरू की, तो एक सीट पर बैठे महिला और युवक के चेहरे का रंग उड़ गया। पुलिस को देख वे घबरा गए और बस से उतरकर भागने की फिराक में थे। उनकी संदिग्ध हरकतों ने पुलिस का शक गहरा दिया। महिला पुलिसकर्मियों की मदद से दोनों को तुरंत रोक लिया गया। शुरुआत में दोनों ने सामान्य यात्री होने का नाटक किया और गोलमोल जवाब दिए, लेकिन कड़ाई से पूछताछ करने पर उनके हौसले पस्त हो गए। उन्होंने अपने पास नशीले पदार्थ होने की बात स्वीकार कर ली। लेडी तस्कर के फैशनेबल हैंडबैग से 72.50 ग्राम हेरोइन बरामद की गई।
ड्रग्स तस्करी का बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद डगरूआ थाने में दोनों तस्करों से लंबी पूछताछ हुई, जिससे ड्रग्स तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। तस्करों ने बताया कि वे अपने तीसरे साथी विकास कुमार के साथ मिलकर असम के सिलचर जाते थे। वहां एक होटल में कमरा बुक करते और त्रिपुरा का मुख्य सप्लायर रूपन उरांग उन्हें हेरोइन की डिलीवरी देता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। खेप हाथ आने के बाद यह गिरोह ट्रेन या निजी गाड़ी के बजाय सिलीगुड़ी तक बस से आता था।
सिलीगुड़ी से वे बिहार के लिए चलने वाली साधारण बसों में सवार होते ताकि पुलिस चेकिंग से बच सकें। बिहार पहुंचने के बाद वे पूर्णिया और वैशाली समेत कई जिलों के गांवों में घूम-घूम कर छोटे पैडलर्स और नशेड़ियों को यह हेरोइन बेचते थे। इस धंधे में होने वाले मुनाफे को तीनों आपस में बराबर बांटते थे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
फरार तस्करों की तलाश में छापेमारी जारी
डगरूआ पुलिस ने पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की तैयारी चल रही है। अपर थानाध्यक्ष ने बताया कि इस गिरोह के तीसरे फरार पार्टनर विकास कुमार और त्रिपुरा के सप्लायर रूपन उरांग की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है। पुलिस इन दोनों की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है और उनके पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।







