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Bihar Rail Project: बिहार में बदलेगी तस्वीर, 160 KM/H की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेनें, जानिए मुजफ्फरपुर- सीतामढ़ी- दरभंगा -रक्सौल- नरकटियागंज में Rail Project की हर बात

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Bihar Rail Project: नेपाल सीमा से सटे बिहार के इलाकों में अब रेलवे की रफ्तार बदलने वाली है! भारतीय रेलवे एक ऐसी परियोजना पर काम शुरू करने जा रहा है, जिससे मुजफ्फरपुर से नरकटियागंज तक ट्रेनों की स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाएगी. यह सिर्फ रफ्तार नहीं, बल्कि बिहार की सामरिक और आर्थिक तस्वीर भी बदलने वाली है.

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भारतीय रेलवे ने मुजफ्फरपुर- सीतामढ़ी- दरभंगा -रक्सौल- नरकटियागंज रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की पूरी तैयारी कर ली है. इस 255 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर दोहरीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम शुरू होने वाला है, जिस पर लगभग 4079.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी Bihar Rail Project को सामरिक और पर्यटन दोनों दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना है, यही कारण है कि इसे इमरजेंसी वर्क श्रेणी में शामिल किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद अब जल्द ही जमीन पर काम शुरू होने की उम्मीद है.

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बिहार रेल परियोजना: क्यों है यह महत्वपूर्ण?

वर्तमान में उत्तर बिहार के इस रेलखंड पर ट्रेनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा है. लेकिन नई डबल लाइन बिछने और भारी रेल पटरियों के इस्तेमाल के बाद ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी. इसके लिए 60 किलोग्राम वजन वाली मजबूत रेल पटरियों का उपयोग किया जाएगा, जो हाई स्पीड के साथ-साथ भारी मालगाड़ियों का दबाव भी आसानी से झेल सकेंगी. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस रेलखंड पर क्षमता से कहीं अधिक यातायात का दबाव है. अभी लाइन की क्षमता का 91 प्रतिशत से ज्यादा उपयोग हो रहा है, और मरम्मत के दौरान यह दबाव 107 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. अनुमान है कि वर्ष 2029 तक यह दबाव 242 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा, ऐसे में डबल लाइन का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया है.

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क्या होगा फायदा और कौन से जिले होंगे लाभान्वित?

सिंगल लाइन होने के कारण फिलहाल रोजाना कई मालगाड़ियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. इस रूट से प्रतिदिन 11 जोड़ी यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 23 से 25 मालगाड़ियां गुजरती हैं. दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या में वृद्धि होगी और बिना रुके तेज गति से परिचालन संभव हो पाएगा. इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों को मिलेगा. रेलवे का मानना है कि इससे सेना और आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही में तेजी आएगी, जिससे देश की सामरिक शक्ति मजबूत होगी. साथ ही, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों की रेल कनेक्टिविटी काफी बेहतर हो जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। परियोजना के तहत 17 नदियों और 288 नालों पर कुल 307 पुलों और पुलियों का निर्माण किया जाएगा. यह रेल लाइन पांच बड़े जंक्शन, 24 स्टेशनों और 17 हाल्ट से होकर गुजरेगी. दिल्ली की एजेंसी मैट्रिक्स जियो सॉल्यूशन ने इस पूरे प्रोजेक्ट का फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा कर लिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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