Bihar Cyber Crime: बिहार के सारण जिले में पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से देशव्यापी ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। बुधवार, को संयुक्त पुलिस टीम ने दिघवारा थाना क्षेत्र के उन्हचक गांव में गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। इस विशेष अभियान में साइबर थाना और स्थानीय पुलिस ने मिलकर दो शातिर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
गिरफ्तार आरोपी भोले-भाले इंटरनेट उपभोक्ताओं को लुभावने गेमिंग ऐप्स और इनामों का लालच देकर उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल फोन और पासबुक बरामद किए हैं। डिजिटल स्पेस में बढ़ रहे वित्तीय अपराधों पर नकेल कसने के उद्देश्य से इस त्वरित कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
आधी रात को पुलिस की दबिश और दो शातिर गिरफ्तार
सारण जिले के दिघवारा पुलिस तंत्र को पिछले कई दिनों से इलाके में कुछ संदिग्ध युवाओं के सक्रिय होने की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद साइबर डीएसपी के नेतृत्व में एक विशेष रणनीतिक टीम का गठन किया गया। पुलिस दल ने पूरी तैयारी के साथ उन्हचक गांव में चिन्हित ठिकाने पर अचानक दबिश दी।
इस अप्रत्याशित छापेमारी से अपराधियों को भागने का बिल्कुल मौका नहीं मिला। पुलिस ने मौके से दो मुख्य आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए ठगों की पहचान अवतार नगर थाना क्षेत्र के मीरपुर जुअरा गांव के निवासी आयुष कुमार और दिघवारा के ही उन्हचक निवासी सन्नी कुमार के रूप में हुई है। ये दोनों मिलकर एक सुनियोजित सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक दस्तावेजों का जखीरा बरामद
गिरफ्तार अपराधियों के छिपने के ठिकाने की तलाशी के दौरान जांच अधिकारी भी बरामद सामान देखकर दंग रह गए। पुलिस टीम ने कमरे से दो हाईटेक लैपटॉप और 19 चालू स्मार्टफोन जब्त किए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उनके पास से अलग-अलग राज्यों के पते पर एक्टिवेट किए गए 72 फर्जी सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
इसके साथ ही डिजिटल वित्तीय हेरफेर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों की 11 पासबुक और सात चेकबुक भी पुलिस के हाथ लगी हैं। इन सभी उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
साइबर डीएसपी चंद्रभूषण ने मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं है। यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।
संगठित सिंडिकेट और वित्तीय लेनदेन का बड़ा नेटवर्क
आरोपी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को ऊंचे रिटर्न और सट्टेबाजी का झांसा देते थे। पैसे ऐंठने के लिए ये लोग हर बार नए सिम कार्ड और फर्जी नामों पर खुले बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। ठगी की रकम को तुरंत अलग-अलग दर्जनों खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि पुलिस की साइबर सेल आसानी से पैसों के रूट को ट्रैक न कर सके।
गिरफ्तार आयुष और सन्नी से साइबर थाने में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बरामद दस्तावेजों से देश के कई अन्य राज्यों में फैले इस गिरोह के नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है। पुलिस अब इन खातों में हुए कुल टर्नओवर का पता लगाने के लिए संबंधित बैंकों से संपर्क साध रही है। इसके साथ ही इस धंधे में शामिल उनके अन्य साथियों और मास्टरमाइंड की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है।







