
Sitamarhi News: लखनदेई नदी, जिसे “सीता सखी” (लक्ष्मणा नदी) भी कहा जाता है, बिहार के सीतामढ़ी जिले की मुख्य जीवनरेखा है। यह नेपाल की शिवालिक पहाड़ियों से निकलकर बागमती नदी में मिलती है, जो लगभग 170 किमी लंबी है। दशकों की उपेक्षा, अतिक्रमण और सूखने के बाद, प्रशासन ने इसे जीवित करने का उपाय शुरू किया है। पढ़िए
सीतामढ़ी की जीवनरेखा मानी जाने वाली लखनदेई नदी क्या फिर से अपनी पुरानी धार पा सकेगी? दशकों से गंदगी और अतिक्रमण का शिकार रही इस जीवनदायिनी नदी को बचाने के लिए अब प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी खुद सड़कों पर उतरे और एक बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है, जिससे नदी को नारकीय स्थिति से मुक्ति मिलने की आस जगी है।
सीतामढ़ी शहर की जीवनरेखा और आस्था का केंद्र मानी जाने वाली लखनदेई नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। रविवार को जिलाधिकारी रिची पाण्डेय के नेतृत्व में नदी की साफ-सफाई के लिए एक विशाल विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में विभिन्न विभागों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी श्रमदान किया, ताकि नदी को उसकी पुरानी गरिमा वापस दिलाई जा सके।
लंबे समय से उपेक्षा, प्रदूषण और अवैध अतिक्रमण के कारण लखनदेई नदी की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी थी। नदी का प्रवाह रुकने और कचरे के अंबार ने इसके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया था। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने न सिर्फ सफाई कार्य शुरू किया, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से नदी से जोड़ने की पहल की। जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने खुद नदी किनारे जमा कचरे को हटाने में हाथ बंटाया और सभी को स्वच्छता का संकल्प दिलाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
लखनदेई नदी: सीतामढ़ी में एक महत्वपूर्ण पहल
अभियान के दौरान जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि लखनदेई नदी सीतामढ़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। इसे स्वच्छ और अविरल रखना केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि नदी में गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने नदी तट पर रहने वाले लोगों से अपील की कि वे कूड़ा-कचरा सीधे जलधारा में न फेंकें।
प्रशासन का संकल्प और नागरिक भागीदारी
इस सफाई अभियान ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि सामूहिक प्रयासों से लखनदेई की पुरानी गरिमा वापस लौट सकती है। स्थानीय लोगों की भागीदारी ने इस मुहिम को और बल दिया है। भविष्य में भी ऐसे जनभागीदारी वाले अभियान जारी रखने पर जोर दिया गया है।
स्थायी समाधान की दिशा में कदम
मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने नदी की दुर्दशा पर चिंता जाहिर करते हुए इसके स्थायी सौंदर्यीकरण और दीर्घकालिक नदी पुनर्जीवन की मांग उठाई। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नगर निगम को नियमित सफाई के साथ-साथ सीवेज ट्रीटमेंट और अतिक्रमण हटाने के लिए एक ठोस योजना बनानी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य हुआ तो यह नदी पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकती है और नदी पुनर्जीवन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करेगी।
हम आशा करते हैं कि यह अभियान लखनदेई नदी के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस Sitamarhi News से जुड़ी और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







