आईपी कैमरा: बिहार के वैशाली में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर ला दिया है। हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर एक सिग्नल टावर पर हाईटेक IP कैमरा मिला है, जो 4G सिम के ज़रिए सीधे इंटरनेट से जुड़ा था और संवेदनशील डेटा भेज रहा था। इस ख़बर से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
यह चौंकाने वाली घटना बुधवार को तब सामने आई जब रूटीन निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की नज़र टावर के ऊपरी हिस्से पर लगी एक अनजान डिवाइस पर पड़ी। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार एटीएस (ATS) और एसटीएफ (STF) ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। शुरुआती जांच में इसके पीछे किसी बड़े आतंकी नेटवर्क या बाहरी मुल्क के हाथ होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि जिस सटीक ढंग से इसे लगाया गया था वह किसी प्रोफेशनल रेकी की ओर इशारा करता है।
संदिग्ध युवक और एनजीओ कनेक्शन
सराय स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को एक अहम सुराग दिया है। कुछ दिनों पहले इलाके में एक अज्ञात युवक देखा गया था जो खुद को एक एनजीओ (NGO) का सदस्य बता रहा था। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इसी युवक ने कर्मचारी का वेश धरकर बड़ी चालाकी से सिग्नल टावर पर चढ़कर इस कैमरे को फिट किया। यह उपकरण इतनी ऊंचाई पर था कि आम राहगीरों की नज़र वहां तक नहीं पहुंच सकती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस अब उस कथित एनजीओ की सत्यता और उस संदिग्ध युवक के हुलिए के आधार पर उसकी तलाश कर रही है।
4G सिम और हाईटेक IP कैमरा: एक हाईटेक उपकरण
ज़ब्त किया गया IP कैमरा कोई मामूली उपकरण नहीं है बल्कि एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक जासूसी टूल है। इसमें लगी 4G सिम के माध्यम से इसे दुनिया के किसी भी कोने से ऑपरेट किया जा सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कैमरे का मुख्य उद्देश्य रेलवे ट्रैक की गतिविधियों और वहां से गुजरने वाली ट्रेनों के समय और लोड की सटीक जानकारी जुटाना था। सुरक्षा एजेंसियां अब सिम कार्ड के आईपी एड्रेस और डेटा ट्रांसफर की लोकेशन ट्रेस कर रही हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इस जासूसी के तार कर्नाटक के कुछ संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड को सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से बिहार के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में गिना जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि कहीं यह किसी बड़े हमले की पूर्व तैयारी यानी ‘रेकी’ तो नहीं थी। जिस तरह से हाईटेक सिम और गोपनीय तरीके का इस्तेमाल हुआ है वह अक्सर सीमा पार बैठे हैंडलर्स के तौर-तरीकों से मेल खाता है। फिलहाल सुरक्षा बल इस बात की जांच कर रहे हैं कि कैमरे से डेटा पाकिस्तान या किसी अन्य देश में तो नहीं भेजा जा रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल और हाई अलर्ट
इस घटना ने रेलवे के सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है। सिग्नल टावर जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर किसी बाहरी व्यक्ति का चढ़कर कैमरा लगा देना बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। घटना के बाद सराय स्टेशन सहित पूरे रेलखंड पर चौकसी बढ़ा दी गई है। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते ने भी पटरियों के आसपास सघन तलाशी अभियान चलाया है। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि कोई भी संदिग्ध व्यक्ति रेलवे संपत्ति के पास दिखे तो तुरंत सूचित करें।







