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मार्च, 16, 2026
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पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारत की Energy Security कूटनीति

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Energy Security: पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और देश में गैस आपूर्ति की संभावित किल्लत के बीच, नई दिल्ली की कूटनीति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है। भारत एक ओर ईरान के साथ संवाद स्थापित कर रहा है, तो दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। इसका एक स्पष्ट उदाहरण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से दो भारतीय एलपीजी टैंकरों का सुरक्षित गुजरना है, जो इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के संयुक्त हवाई हमलों के बाद पिछले करीब दो हफ्तों से पूरी तरह बंद था। मौजूदा युद्धग्रस्त क्षेत्र से फिलहाल भारत, चीन और रूस को ही इस महत्वपूर्ण ट्रांजिट मार्ग से गुजरने की अनुमति मिली है।

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# पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारत की Energy Security कूटनीति

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भारत ने शुरुआत में ईरान पर अमेरिकी हमलों पर भले ही चुप्पी साधी थी, लेकिन युद्ध के ऊर्जा और वित्तीय बाजारों पर बढ़ते असर को देखते हुए नई दिल्ली ने अपनी कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयातक देशों में से एक है और युद्ध के बीच इसकी भारी किल्लत महसूस की जा रही है। एलपीजी का उपयोग न केवल रसोई गैस के रूप में होता है, बल्कि औद्योगिक कार्यों में भी इसका व्यापक इस्तेमाल किया जाता है।

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## भारत की Energy Security के लिए कूटनीतिक संतुलन

इसके साथ ही, भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बाद महंगाई बढ़ने का दबाव तीव्र हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, भारतीय मुद्रा भी डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर के करीब पहुंच गई है, जिससे आर्थिक चिंताएं और बढ़ गई हैं।

## दोहरी चुनौती: ईरान और अमेरिका के साथ संतुलन

एक तरफ जहां भारत ने ईरान से संपर्क साधा है, वहीं दूसरी ओर युद्ध के बीच अपने करीबी रणनीतिक और आर्थिक साझेदार संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भी संबंध मजबूत बनाए रखना चाहता है। इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत को राहत देते हुए अपने पुराने रुख से अलग रवैया अपनाया। इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस से सस्ता तेल खरीदने के कारण भारत पर जुर्माने के तौर पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ था। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार भी है और हाल ही में हुई एक डील के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ में कटौती का ऐलान किया था।

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अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि भारत इस समय एक संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के संस्थापक नितिन पाई के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से भारतीय एलपीजी टैंकरों का गुजरना इस बात का सीधा संकेत है कि नई दिल्ली की कूटनीति सफल हो रही है। यह भारतीय विदेश नीति की परिपक्वता को दर्शाता है जो जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में अपने आर्थिक हितों और रणनीतिक संबंधों को साधने में सक्षम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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