
Forex Reserves: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू लिया है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूत स्थिति का प्रमाण है। यह न केवल हमारी आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक झटकों से निपटने की हमारी क्षमता को भी मजबूत करता है।
भारत का Forex Reserves नए रिकॉर्ड स्तर पर, $723.77 अरब के पार पहुंचा भंडार
रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा भारत का Forex Reserves: विस्तार से जानें
भारत के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर बेहद राहत भरी खबर सामने आ रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 30 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 14.36 अरब डॉलर की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 723.77 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को रेखांकित करती है।
इससे पहले वाले सप्ताह में भी देश के विदेशी भंडार में 8.05 अरब डॉलर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 709.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए ये आंकड़े बताते हैं कि देश का भंडार लगातार मजबूत हो रहा है। वहीं, इससे पहले सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा था। यह दर्शाता है कि हाल के महीनों में देश के पास विदेशी मुद्रा की उपलब्धता में लगातार सुधार हुआ है।
सोने का भंडार और अन्य महत्वपूर्ण घटक
ताजा RBI Data के अनुसार, देश के गोल्ड रिजर्व में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, सोने का भंडार 14.59 अरब डॉलर बढ़कर 137.68 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। सोने के भंडार में यह वृद्धि वैश्विक बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों और केंद्रीय बैंक द्वारा सोने की खरीदारी दोनों का परिणाम हो सकती है, जो संकट के समय में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी वृद्धि देखने को मिली है। यह 21.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.95 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंच गया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets – FCA) 49.3 करोड़ डॉलर घटकर 562.39 अरब डॉलर पर आ गईं। इन परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल रहता है। FCA में कमी के बावजूद कुल भंडार में वृद्धि देश के अन्य घटकों, विशेषकर सोने के भंडार की मजबूती को दर्शाती है।
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने भू-राजनीतिक हालात का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा। कारोबार के अंत में यह 31 पैसे गिरकर 90.65 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार रुपये को ऐसे बाहरी झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण स्थिरता प्रदान करता है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
विदेशी मुद्रा भंडार में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी वैश्विक निवेशकों के लिए भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास का प्रतीक है। यह देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश में अधिक लचीलापन प्रदान करता है, साथ ही बाहरी देनदारियों को पूरा करने की क्षमता को भी मजबूत करता है। ऐसे मजबूत भंडार से देश की साख बढ़ती है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में इसकी स्थिति और सुदृढ़ होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

