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मध्य-पूर्व संकट का भारत में LPG Supply पर गहरा असर: मुंबई के होटल संकट में

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LPG Supply: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे भारत में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति सीमित हो गई है। ईरान की ओर से धमकी के बाद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है, जहां कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई सीमित कर दी गई है। मुंबई में इस कमी के कारण करीब 20 प्रतिशत तक होटल बंद होने की नौबत आ गई है। यह एक गंभीर स्थिति है जो देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन दोनों पर गहरा असर डाल सकती है।

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मध्य-पूर्व संकट का भारत में LPG Supply पर गहरा असर: मुंबई के होटल संकट में

भारत की LPG Supply: आत्मनिर्भरता और आयात का संतुलन

भारत हर साल लगभग 31.2 मिलियन टन (करीब 3.13 करोड़ टन) एलपीजी का उपभोग करता है। इस विशाल मांग को पूरा करने के लिए, देश अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत, यानी लगभग 12.4 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है। घरेलू उपयोग में 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, भारत सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू किया है, जो इस बात का संकेत है कि देश इस चुनौती को कितनी गंभीरता से ले रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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भारत की एलपीजी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो कुल आयात का लगभग 80 प्रतिशत है। इसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लगभग 26 प्रतिशत, कतर (Qatar) से 22 प्रतिशत और सऊदी अरब (Saudi Arabia) से करीब 22 प्रतिशत एलपीजी शामिल है। शेष 33 प्रतिशत अन्य देशों से आयात की जाती है। इस भारी निर्भरता के कारण, मध्य-पूर्व में किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत में पेट्रोलियम उत्पाद की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ता है। यह स्थिति भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर चिंता का विषय बनी हुई है।

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उपभोक्ताओं और उज्ज्वला योजना पर असर

मार्च 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। 7 मार्च को सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर करीब 913 रुपये हो गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है, के तहत लगभग 10.5 करोड़ लाभार्थी हैं। इन्हें प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जिसके बाद उन्हें एक सिलेंडर के लिए लगभग 613 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। हालांकि, व्यावसायिक एलपीजी की सीमित आपूर्ति का असर छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों, विशेषकर होटल और रेस्तरां पर पड़ रहा है, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ रही है और कई जगहों पर काम बंद होने की नौबत आ गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह संकट न केवल उद्योगों बल्कि आम जनता की जेब पर भी भारी पड़ रहा है।

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