

Indian Rupee: भारतीय रुपये में सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार कमजोर होना वैश्विक और घरेलू आर्थिक कारकों के जटिल मेलजोल को दर्शाता है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का प्रतिबिंब है, जिस पर हर नागरिक की जेब का भविष्य टिका है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लुढ़का: जानें क्या हैं इसके मायने और आगे की राह
भारतीय रुपया क्यों हुआ कमजोर?
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय रुपये में एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली। सुबह के कारोबार में रुपया चार पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.95 पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.91 पर खुला, लेकिन बाद में फिसलकर 90.95 पर आ गया। इससे पहले गुरुवार को यह 90.91 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ था। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और घरेलू शेयर बाजारों की नकारात्मक शुरुआत से रुपये पर दबाव बना। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हालांकि, डॉलर में वैश्विक कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखने में मदद की। इस दौरान डॉलर सूचकांक, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाता है, 0.09% गिरकर 97.70 पर रहा। इससे पहले बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चार पैसे की मजबूती के साथ 90.91 पर बंद हुआ था, जिससे बाजार में हल्की राहत महसूस की गई थी। उस समय डॉलर में नरमी, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली और घरेलू शेयर बाजारों में स्थिर रुख से रुपये को समर्थन मिला था।
घरेलू और वैश्विक बाजार का असर
घरेलू शेयर बाजार में भी इस दौरान दबाव साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 364.62 अंक गिरकर 81,883.99 पर और Nifty 50 117.15 अंक फिसलकर 25,379.40 पर पहुंच गया। यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के कारण भी देखी गई, जिन्होंने गुरुवार को 3,465.99 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक Brent Crude 0.07% गिरकर 70.70 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जिससे आयात बिल पर कुछ दबाव कम हुआ।
विशेषज्ञों की राय और आगे की उम्मीदें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय रुपये की तेजी सीमित रही। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने बताया कि यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार शुल्क को लेकर अनिश्चितता के बीच रुपया नकारात्मक रुख में रह सकता है।
बाजार जिनेवा में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों और अमेरिका से आने वाले रोजगार आंकड़ों पर नजर रखे हुए है। चौधरी ने अनुमान जताया कि डॉलर-रुपया हाजिर दर 90.60 से 91.20 के दायरे में रह सकती है। यह दिखाता है कि निकट भविष्य में रुपये में अस्थिरता बनी रह सकती है, और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



