
Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ समय से एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं और घरेलू पूंजी का प्रवाह लगातार मजबूत हो रहा है। यह प्रवृत्ति बाजार के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है, जिस पर दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने भी अपनी राय व्यक्त की है।
भारतीय शेयर बाजार: विदेशी बिकवाली और घरेलू खरीद का अनूठा संगम
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक उदय कोटक ने हाल ही में सोशल मीडिया पर इस दिलचस्प बदलाव को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचकर बाहर निकल रहे हैं और उन्हीं शेयरों को भारतीय निवेशक भारी मात्रा में खरीद रहे हैं। अल्पकाल में, उदय कोटक मानते हैं कि विदेशी निवेशक ‘स्मार्ट’ दिखाई देते हैं, क्योंकि डॉलर के लिहाज से देखें तो पिछले एक साल में भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न लगभग शून्य रहा है। यानी, रुपये के संदर्भ में भले ही बाजार ने कुछ कमाई दी हो, लेकिन डॉलर में विदेशी निवेशकों को विशेष लाभ नहीं हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी बनाम घरेलू निवेशकों की चाल
आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति और भी स्पष्ट हो जाती है। वर्ष 2025 में अब तक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। इसके विपरीत, इसी अवधि में घरेलू निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड और एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया है। हर महीने औसतन 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम एसआईपी के जरिए बाजार में आ रही है, जो घरेलू निवेशकों के मजबूत भरोसे और बाजार में गहरी पैठ को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विदेशी निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारतीय रुपये की लगातार कमजोरी है। जब वे भारतीय बाजार में निवेश करते हैं, तो डॉलर को रुपये में बदलते हैं और जब बाहर निकलते हैं, तो रुपये को वापस डॉलर में परिवर्तित करना होता है। रुपये के लगातार कमजोर होने से उन्हें डॉलर के मुकाबले नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे उनका कुल रिटर्न डॉलर के हिसाब से शून्य या नकारात्मक हो जाता है। यह रुपया-डॉलर विनिमय दर का सीधा असर है जो विदेशी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रहा है।
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घरेलू निवेशकों की तस्वीर भी पूरी तरह से गुलाबी नहीं है। जिन निवेशकों ने पिछले साल इसी समय निवेश शुरू किया था, उन्हें लार्ज कैप फंड्स में औसतन करीब 5 प्रतिशत का ही रिटर्न मिला है। वहीं, मिडकैप फंड्स में कई मामलों में रिटर्न नकारात्मक रहा है, और स्मॉल कैप सेगमेंट पर तो और भी ज्यादा दबाव देखने को मिला है। यह दर्शाता है कि बाजार में चुनिंदा क्षेत्रों में ही तेजी दिख रही है और सभी निवेशकों को एक समान लाभ नहीं मिल रहा है।
रुपये की कमजोरी और निवेशकों का धैर्य
ऐसे में यह सवाल उठता है कि लंबी अवधि में कौन सही साबित होगा – विदेशी निवेशक, जो रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं, या घरेलू निवेशक, जो बाजार की गिरावट को एक अवसर मानकर नियमित निवेश जारी रखे हुए हैं। उदय कोटक के अनुसार, इस प्रश्न का सटीक उत्तर समय के साथ ही सामने आएगा। उनका कहना है कि शेयर बाजार में असली समझ और धैर्य का इम्तिहान हमेशा लंबी अवधि में ही होता है। बाजार के उतार-चढ़ाव में धैर्य ही सफल निवेश की कुंजी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक फायदेमंद होता है। बाजार की मौजूदा स्थिति में, घरेलू निवेशकों का आत्मविश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था में उनके विश्वास को दर्शाता है, जबकि विदेशी निवेशक वैश्विक कारकों और मुद्रा जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील दिखते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






