
Stock Market: ईरान-इजरायल युद्ध से उपजी भू-राजनीतिक अनिश्चितता का भारतीय शेयर बाजार पर सीधा और गहरा असर पड़ा है, जिससे पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अब निवेशकों की निगाहें 9 मार्च से शुरू हो रहे नए सप्ताह पर टिकी हैं, जहां पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा।
# आगामी सप्ताह में भारतीय Stock Market की दिशा: क्या कहते हैं विशेषज्ञ और क्या हैं चुनौतियाँ?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव से निर्धारित होगी। इसके अतिरिक्त, वैश्विक बाजार के रुझान और विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की धारणा को काफी हद तक प्रभावित करेगा। यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसी परिस्थितियों में आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
## वैश्विक तनाव का Stock Market पर असर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने इस विषय पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, ”यह सप्ताह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण बाहरी कारक बने रहेंगे। इसके साथ ही, कुछ प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़े भी जारी होंगे, जो निकट भविष्य की धारणा को आकार दे सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।” उन्होंने आगे बताया कि घरेलू मोर्चे पर निवेशक 12 मार्च को जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे। गौरतलब है कि वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 8.52 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है।
ऑनलाइन कारोबार और संपत्ति फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि आने वाले सप्ताह में बाजार अस्थिरता बने रहने की संभावना है, क्योंकि बाजार की धारणा काफी हद तक पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित होगी। उन्होंने जोर दिया कि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ऊर्जा बाजार जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
## एफआईआई की वापसी पर संशय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अनिश्चितता, बाजार में लगातार गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता और रुपये की तेज गिरावट ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली को बढ़ाया है। विजयकुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक संघर्ष के परिणाम पर कुछ स्पष्टता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं होती, तब तक एफपीआई के खरीदार के रूप में बाजार में लौटने की संभावना कम है। यह स्थिति भारतीय बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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