
Gold Price: मध्य पूर्व में जारी ईरान और इजरायल के बीच तनावपूर्ण सैन्य टकराव के बावजूद, वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आमतौर पर देखी जाने वाली उछाल इस बार नदारद है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद कीमती धातुओं के भाव पर दबाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों के अप्रत्याशित व्यवहार का परिणाम है।
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच क्यों नहीं चमक रहा Gold Price?
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी मौजूदा संघर्ष को लगभग दो सप्ताह हो चुके हैं, जिसमें दोनों पक्ष ड्रोन हमलों और अन्य सैन्य कार्रवाइयों के माध्यम से अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे भू-राजनीतिक संकटों में सोना और चांदी ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में देखे जाते हैं, जिससे उनकी मांग और कीमतों में तेजी आती है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां इन कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि के बजाय गिरावट दर्ज की जा रही है।
युद्ध के बावजूद Gold Price में गिरावट: एक अनोखा ट्रेंड
आमतौर पर, जब भी दुनिया में कोई बड़ा युद्ध या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं। लेकिन ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान, इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय दोनों बाजारों में सोना-चांदी की कीमतें गिरी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यहां कुछ प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना:
- 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने पर: 5416 डॉलर प्रति औंस।
- वर्तमान में (मध्य पूर्व में भारी तनाव के बावजूद): लगभग 5108 डॉलर प्रति औंस।
- यह लगभग 5.6% की गिरावट दर्शाता है।
- भारत में सोने की कीमतें (MCX पर):
- 28 फरवरी को: लगभग 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम।
- वर्तमान में: लगभग 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम।
- यह लगभग 4.8% की गिरावट है।
चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई है। 28 फरवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर चांदी लगभग 2.89 लाख रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो 13 मार्च तक गिरकर लगभग 2.62 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
कीमती धातुओं में सुस्ती के प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध जैसे बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में यह सुस्ती कुछ प्रमुख कारकों के कारण है। इन कारकों में सबसे महत्वपूर्ण है अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) की मजबूती। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तो सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे स्वाभाविक रूप से सोने और चांदी की मांग अस्थायी रूप से कम हो जाती है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वास्तव में, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों ने मिलकर कीमती धातुओं की चमक को फीका कर दिया है, भले ही भू-राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ हो। निवेशक इस समय पारंपरिक ‘सुरक्षित पनाहगाह’ माने जाने वाले सोने के बजाय डॉलर में निवेश करना अधिक सुरक्षित मान रहे हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
यह समझना महत्वपूर्ण है कि बाजार की ऐसी प्रतिक्रियाएँ जटिल होती हैं और कई आर्थिक तथा भू-राजनीतिक कारकों का परिणाम होती हैं। फिलहाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीतियों का प्रभाव युद्ध के पारंपरिक प्रभावों पर हावी होता दिख रहा है, जिससे सोना और चांदी एक नई दिशा में कारोबार कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




