back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 2, 2026
spot_img

इजरायल-ईरान युद्ध का कहर: भारतीय शेयर बाजार पर मंडराया संकट का बादल!

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Stock Market: मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर पड़ रहा है, और सबसे ज्यादा इसकी आंच शेयर बाजार पर महसूस की जा रही है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संभावित हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाइयों ने न सिर्फ वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ला दिया है, बल्कि इसने निवेशकों की बेचैनी भी बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका गहरा गई है। यह सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर उभरा है।

- Advertisement -

इजरायल-ईरान युद्ध का कहर: भारतीय शेयर बाजार पर मंडराया संकट का बादल!

शेयर बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर

पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 961.42 अंक या 1.17 परसेंट गिरकर 81287.19 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 317.90 अंक या 1.25 परसेंट की गिरावट के साथ 25178.65 के लेवल पर बंद हुआ था। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली हमलों में मौत होने की अटकलों ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों में डर का माहौल है। टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ को गैर-कानूनी मानने का फैसला, और AI से जुड़े अनुमानों को लेकर पहले से ही निवेशक आशंकित थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से दुनिया भर में अनिश्चितता और बढ़ गई है। ऐसे में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की सप्लाई से लेकर शेयर बाजार के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

- Advertisement -

हॉरमुज स्ट्रेट: वैश्विक तेल आपूर्ति का गला

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा माहौल घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा सकता है। इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति का सबसे बड़ा ‘हॉट स्पॉट’ हॉरमुज स्ट्रेट बना हुआ है क्योंकि दुनिया की लगभग 20 परसेंट तेल सप्लाई इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। अगर ईरान-इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बंद हो जाता है, तो कच्चा तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं। भारत पर इसका गहरा असर पड़ने की आशंका है क्योंकि देश का 60 परसेंट LPG इंपोर्ट और लगभग 50 परसेंट तेल इंपोर्ट इसी रास्ते से होकर आता है। ऐसे में इस रूट पर किसी भी हलचल का तुरंत और बड़ा मैक्रोइकोनॉमिक असर होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब बाजार में जोखिम बढ़ना है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 75 परसेंट से ज्यादा पेट्रोलियम इम्पोर्ट करता है। आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर अस्थिरता बढ़ने से महंगाई बढ़ने, करंट अकाउंट इम्बैलेंस के बढ़ने और RBI के रेट कर्व पर असर पड़ने की संभावना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

यह भी पढ़ें:  वैश्विक तनाव के बीच भारतीय Stock Market में विदेशी निवेशकों का रुझान: एक विश्लेषण
- Advertisement -

जरूर पढ़ें

भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: फरवरी 2026 में GST Collection ने छुआ 1.83 लाख करोड़ का आंकड़ा

GST Collection: फरवरी 2026 में भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह...

Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर राशि अनुसार दान से पाएं सुख-समृद्धि और सौभाग्य

Falgun Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में दान का अत्यधिक महत्व है, विशेषकर पूर्णिमा जैसे...

NCERT Books पर बड़ा फैसला: लाखों छात्रों को मिली राहत

NCERT Books: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 के छात्रों...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें