

Online Food Delivery: भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल लैंडस्केप में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने हमारी जीवनशैली को काफी बदल दिया है, लेकिन इसके पीछे की मेहनत और चुनौतियां अक्सर अनदेखी रह जाती हैं। हाल ही में, एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसने इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स की मुश्किलों को एक बार फिर सामने ला दिया है। एक स्विगी डिलीवरी बॉय का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें वह अपने फूड बैग को सड़क पर घसीटता हुआ दिखाई दे रहा है। दावा है कि उसे 6.2 किलोमीटर की डिलीवरी के लिए मात्र 35 रुपये का भुगतान किया गया, जिसने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों की पेमेंट पॉलिसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी: 6.2 KM के लिए 35 रुपये! वायरल वीडियो ने स्विगी डिलीवरी सिस्टम पर उठाए सवाल
ऑनलाइन फूड डिलीवरी का कड़वा सच
यह घटना तब सामने आई जब एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह वीडियो साझा किया गया, जिसमें एक डिलीवरी पार्टनर अपने स्विगी के फूड बैग को सड़क पर घसीटता हुआ नजर आता है। वीडियो में उसकी हताशा साफ झलक रही है, और बताया जा रहा है कि इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद उसे बहुत कम कमीशन मिला। इस वीडियो ने तुरंत ही जनता का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी, जहां कई लोग डिलीवरी पार्टनर्स को मिलने वाले कम भुगतान पर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और लोगों की प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो के वायरल होने के बाद, इंटरनेट पर दो ध्रुवों में बंटी राय सामने आई है। एक पक्ष डिलीवरी बॉय के इस कृत्य की निंदा कर रहा है और इसे गैर-पेशेवर बता रहा है, यह सवाल उठा रहा है कि क्या ग्राहक को मिलने वाला खाना सुरक्षित रहेगा। वहीं, दूसरा और बड़ा वर्ग डिलीवरी कंपनियों, खासकर स्विगी, की भुगतान नीतियों पर सवाल खड़े कर रहा है। यूजर्स का कहना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और शहरों में बढ़ती महंगाई के दौर में 6.2 किलोमीटर की डिलीवरी के लिए मात्र 35 रुपये का भुगतान करना अमानवीय है। यह गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों लोगों की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
कई कमेंट्स में डिलीवरी पार्टनर्स के शोषण का मुद्दा उठाया गया है, जहां उन्हें बेहद कम पैसे में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। एक यूजर ने लिखा, “आजकल तेल कितना महंगा है। 6.2 किलोमीटर के लिए 35 रुपये तो बहुत कम हैं।” दूसरे ने कंपनी से सवाल किया कि आखिर वे अपने पार्टनर्स को इतना कम भुगतान क्यों कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि अगर डिलीवरी बॉय अपने काम से संतुष्ट नहीं है, तो उसे यह काम नहीं करना चाहिए। यह वीडियो इस बात को उजागर करता है कि कैसे गिग इकॉनमी के प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों लोग न्यूनतम मजदूरी और मुश्किल परिस्थितियों में काम करते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/।
डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की चुनौतियां और भविष्य
यह अकेला मामला नहीं है, जब ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी पार्टनर्स के कम भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। कई बार ऐसे वीडियो और रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं, जो इन कंपनियों के कमीशन मॉडल और पार्टनर्स के लिए न्यूनतम मजदूरी की कमी को उजागर करती हैं। स्विगी जैसी कंपनियां जहां ग्राहकों को सुविधा देती हैं, वहीं उन्हें अपने डिलीवरी पार्टनर्स के हितों का भी ध्यान रखना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उचित भुगतान और बेहतर कार्यस्थितियां इन प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता और दीर्घकालिक सफलता के लिए आवश्यक हैं। इस घटना ने एक बार फिर कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को इस मुद्दे पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



