

US China Relations: दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर तनाव की चिंगारी भड़क उठी है। वाशिंगटन के ‘फेज वन’ व्यापार समझौते की समीक्षा और नए टैरिफ लगाने के संकेतों पर बीजिंग ने दो टूक चेतावनी दी है कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करेगा। यह केवल दोनों देशों के बीच की रस्साकशी नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गहरे संकट का संकेत है, जो आपूर्ति श्रृंखलाओं से लेकर शेयर बाजारों तक हर जगह हलचल मचा सकता है।
US China Relations: अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध की वापसी के संकेत, वैश्विक बाजारों पर मंडराया संकट!
US China Relations: बीजिंग की सीधी चेतावनी और अमेरिकी रुख
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर की हालिया टिप्पणियों के बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce of the People’s Republic of China) ने स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 महामारी से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद, चीन ने 2020 के ‘फेज वन’ समझौते का पूरी तरह से पालन किया है। इस दौरान बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) नियमों का सम्मान किया गया और वित्तीय व कृषि क्षेत्रों में विदेशी निवेश के लिए बाजार खोले गए।
हालांकि, चीन ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने निर्यात नियंत्रण (Export Controls) को कड़ा कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश प्रभावित हुआ और सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बाधित हुईं। बीजिंग ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ‘फेज वन’ समझौते की जांच के आधार पर नए टैरिफ लगाता है, तो वह अपने वैधानिक अधिकारों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बीजिंग दौरा प्रस्तावित है, जो 2017 के बाद उनका पहला संभावित चीन दौरा होगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ने ट्रंप के कुछ पूर्व टैरिफ उपायों को अमान्य कर दिया था, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ विवाद फिर से गहराता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, कमोडिटी बाजारों और इक्विटी मार्केट पर पड़ेगा, जिससे व्यापक अस्थिरता देखी जा सकती है। इस साल की शुरुआत में भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव तब चरम पर पहुंच गया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर व्यापक टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
इन टैरिफ कदमों ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और शेयर बाजारों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौतों और लगातार वार्ताओं के जरिए स्थिति को कुछ हद तक सामान्य किया गया, जिससे आपसी रिश्तों में आई कड़वाहट कम हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लेकिन, ‘फेज वन’ समझौते की नई जांच और संभावित नए टैरिफ की चर्चा ने वैश्विक बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि यह टैरिफ युद्ध दोबारा तेज होता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और चीन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर उभरते बाजारों और निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
ऐसे में, आने वाले समय में दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत और उनके रुख पर वैश्विक निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजरें टिकी होंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




