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देश की न्यायिक इतिहास में नया अध्याय— नए CJI Surya Kant की दो टूक: अब सुप्रीम कोर्ट में हर केस की नहीं होगी तत्काल सुनवाई, बदल गए नियम!

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दिल्ली से बड़ी खबर! भारत के न्यायिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पद संभालते ही सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव लाने का संकेत दिया है। उनकी पहली सुनवाई में ही यह साफ हो गया कि अब शीर्ष अदालत में मुकदमों की लिस्टिंग और सुनवाई के तौर-तरीके पूरी तरह बदलने वाले हैं। क्या कुछ नया होने वाला है? जानने के लिए आगे पढ़ें…

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भारत के नव नियुक्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद न्यायिक प्रक्रिया और मामलों की तत्काल लिस्टिंग प्रणाली पर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। पहली बेंच की सुनवाई के दौरान उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अब से कोर्ट में किसी भी मामले को सिर्फ ‘मेंशन’ कर उसी दिन सुनवाई की मांग वाली प्रवृत्ति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चले आ रहे एक चलन पर रोक लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट में नई व्यवस्था की शुरुआत

जस्टिस सूर्यकांत ने जोर देकर कहा कि पिछली प्रथाओं में देखा गया तत्काल सुनवाई वाला सिस्टम अब खत्म होगा। उन्होंने न्यायालय में मौजूद सभी वकीलों को संबोधित करते हुए समझाया कि यह व्यवहार न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव डालता है और न्याय तक सभी की समान पहुंच के सिद्धांत के भी खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब से केवल मौत की सजा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और अत्यावश्यक मामलों को ही तुरंत सूचीबद्ध करने पर विचार किया जाएगा।

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मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों को चेतावनी दी कि तत्काल सुनवाई अब तभी संभव होगी जब वकील अपनी मेंशनिंग स्लिप विधिवत जमा करेंगे और उसे सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मंजूरी मिलेगी। उनके इन कड़े निर्देशों से यह संदेश साफ है कि अब सर्वोच्च न्यायालय में मामलों का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और नियम आधारित होने वाला है। यह न्यायिक प्रक्रिया में अधिक अनुशासन और संस्थागत व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मंशा को दर्शाता है।

पहले ही दिन दिखी सख्ती

जस्टिस सूर्यकांत के इस दिशा में बदलाव का असर उनकी पहली सुनवाई में ही साफ तौर पर देखने को मिला। जब एक वकील ने कोर्ट कैंटीन गिराए जाने से संबंधित एक मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, तो CJI सूर्यकांत ने उसे तुरंत खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत तभी किसी मामले में हस्तक्षेप करेगी, जब वह जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता या संवैधानिक अधिकारों से सीधे तौर पर जुड़ा हो।

कौन हैं भारत के 53वें Chief Justice of India Surya Kant?

जस्टिस सूर्यकांत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष हिंदी में शपथ लेकर भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) का पदभार संभाला है। वे हरियाणा के हिसार जिले से आने वाले पहले CJI हैं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण है। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर सेवानिवृत्त होंगे।

कानून की पढ़ाई में गोल्ड मेडलिस्ट रहे जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक करियर बेहद शानदार रहा है। वे कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अनुच्छेद 370 से संबंधित निर्णय
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश
  • नागरिक अधिकारों की रक्षा के कई अहम फैसले
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