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सावन में रोग मुक्ति का महातीर्थ बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग की महिमा

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Baidyanath Dham Jyotirlinga: देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम एक ऐसा पवित्र धाम है, जहां देवों के देव महादेव स्वयं ‘बैद्यनाथ’ स्वरूप में विराजमान होकर अपने भक्तों के रोगों का हरण करते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत पूजनीय स्थान है, जिसकी महिमा जगविख्यात है।

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बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग: रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति का दिव्य स्रोत

सावन के पवित्र मास में लाखों श्रद्धालु सुदूर क्षेत्रों से कांवड़ यात्रा कर बाबा बैद्यनाथधाम के दर्शन और स्पर्श पूजन हेतु पधारते हैं। ऐसी प्रबल मान्यता है कि यहां बाबा के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने मात्र से गंभीर से गंभीर रोगों का निवारण होता है और व्यक्ति स्वस्थ जीवन प्राप्त करता है। यह ज्योतिर्लिंग न केवल शारीरिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान भी प्रदान करता है। इस दिव्य धाम की महिमा अपरंपार है, जहां आकर हर भक्त स्वयं को भगवान शिव की असीम कृपा से घिरा पाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां का कण-कण शिव भक्ति में डूबा हुआ प्रतीत होता है।

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बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व और कथा

बाबा बैद्यनाथधाम से जुड़ी एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। रावण शिवजी को लंका ले जाना चाहता था, ताकि उसकी लंका अजेय बन जाए। शिवजी ने रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे अपना आत्मलिंग प्रदान किया और कहा कि इसे कहीं भी भूमि पर मत रखना। यदि तुमने ऐसा किया, तो यह वहीं स्थापित हो जाएगा। रावण जब आत्मलिंग लेकर जा रहा था, तब रास्ते में उसे लघुशंका निवारण की आवश्यकता पड़ी। उसने एक ग्वाले के रूप में आए भगवान विष्णु से उस आत्मलिंग को पकड़ने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने रावण के बार-बार आग्रह पर आत्मलिंग पकड़ा, लेकिन उसकी शर्त थी कि वह तीन बार पुकारने पर भी यदि रावण नहीं आता, तो वह लिंग को भूमि पर रख देंगे। रावण के लघुशंका निवारण में अधिक समय लगा, और भगवान विष्णु ने तीन बार पुकारने के बाद आत्मलिंग को धरती पर रख दिया। रावण क्रोधित होकर आया और उसने आत्मलिंग को उठाने का बहुत प्रयास किया, परंतु वह टस से मस नहीं हुआ। अंततः उसने क्रोधवश शिवलिंग पर मुष्टि प्रहार किया और वहां से चला गया। जिस स्थान पर आत्मलिंग स्थापित हुआ, वही आज बाबा बैद्यनाथधाम के नाम से प्रसिद्ध है।

पूजन विधि और महत्व

  • बाबा बैद्यनाथधाम में भक्त प्रातः काल स्नान कर पवित्र होकर दर्शन के लिए कतारबद्ध होते हैं।
  • सर्प्रथम मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर बाबा के शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है।
  • कांवड़िए गंगाजल से भरे कांवड़ लेकर आते हैं और उसी जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।
  • जलाभिषेक के पश्चात दूध, दही, घी, शहद और चीनी के पंचामृत से स्नान कराया जाता है।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग, अकवन के पुष्प, चंदन, अक्षत और धूप-दीप से विधि-विधान से पूजन किया जाता है।
  • शिवलिंग पर वस्त्र, जनेऊ और फूलों की माला अर्पित की जाती है।
  • पुजारीगण वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हैं और भक्तगण ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करते हैं।
  • अंत में आरती की जाती है और भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाता है।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

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बाबा बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग का दर्शन और पूजन भक्तों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। जो भक्त सच्चे मन से यहां आकर अपनी मनोकामनाएं महादेव के समक्ष रखते हैं, उनकी हर इच्छा पूरी होती है। विशेषकर असाध्य रोगों से मुक्ति पाने के लिए यह धाम अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन के सोमवार को यहां जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भगवान शिव सभी के कष्टों का हरण करें, यही हमारी प्रार्थना है।

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