

Chaitra Month 2026: हिंदू धर्म में चैत्र मास का अपना एक विशेष और पवित्र स्थान है, जिसे नववर्ष का प्रारंभिक माह भी माना जाता है। यह माह प्रकृति में नवजीवन और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।
Chaitra Month 2026: चैत्र मास 2026: नववर्ष का आरंभ और प्रमुख पर्व-त्योहार
Chaitra Month 2026: चैत्र मास की महिमा और इसके प्रमुख व्रत
चैत्र मास भारतीय ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का प्रथम माह होता है। यह माह न केवल प्रकृति में नवजीवन का संचार करता है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष का शुभारंभ होता है, जिसे विभिन्न प्रांतों में गुड़ी पड़वा, उगादि, चेटीचंड और संवत्सरारंभ के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पवित्र माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ते हैं, जो भक्तों को ईश्वर से जुड़ने और अपनी आध्यात्मिक उन्नति करने का अवसर प्रदान करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चैत्र मास 2026 का आरंभ 17 मार्च, 2026, मंगलवार से हो रहा है। इस दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होगा, जो देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का महापर्व है। इन नौ दिनों में भक्तगण उपवास रखकर माता रानी की उपासना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि तथा आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। चैत्र मास की हर तिथि अपने आप में खास महत्व रखती है, और इस दौरान किए गए दान-पुण्य एवं धार्मिक अनुष्ठानों का फल अक्षय होता है।
चैत्र मास के प्रमुख व्रत और त्योहार:
- चैत्र नवरात्रि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाली यह नवरात्रि मां दुर्गा को समर्पित है। इस दौरान घटस्थापना कर नौ दिनों तक शक्ति की आराधना की जाती है।
- गुड़ी पड़वा / उगादि: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत में उगादि के रूप में मनाया जाता है, जो हिंदू नववर्ष का प्रतीक है।
- मीन संक्रांति: सूर्य देव का मीन राशि में प्रवेश, जिसका अपना धार्मिक महत्व है।
- शीतला अष्टमी: चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला माता की पूजा की जाती है।
- राम नवमी: चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्री राम का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन होते हैं।
- हनुमान जयंती: चैत्र पूर्णिमा को भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना 2026 शुभ मुहूर्त
| विवरण | समय |
|---|---|
| घटस्थापना तिथि | 17 मार्च 2026, मंगलवार |
| घटस्थापना मुहूर्त | प्रातः 06:15 से 07:29 तक |
| अवधि | 1 घंटा 14 मिनट |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 17 मार्च 2026, प्रातः 05:27 |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 18 मार्च 2026, प्रातः 05:58 |
चैत्र नवरात्रि पूजा विधि (सामान्य)
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
- एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- घटस्थापना के लिए एक मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर आम्रपल्लव और नारियल रखें।
- कलश पर स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें।
- नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
- दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां के मंत्रों का जाप करें।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।
यह मंत्र मां दुर्गा की उपासना में विशेष फलदायी है। इस पवित्र तिथि पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चैत्र मास केवल त्योहारों का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक शुद्धि का भी माह है। इस दौरान हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करने, ब्रह्मचर्य का पालन करने और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने से मन और शरीर दोनों को शांति मिलती है। यह समय नई शुरुआत करने और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
उपाय:
चैत्र मास में प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है।



