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मार्च, 10, 2026
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Navratri Ghatsthapana 2026: क्या अशुभ योगों के बीच होगी चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना? पढ़िए… नवरात्र पर खरमास और पंचक का प्रभाव !

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Navratri Ghatsthapana 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शक्ति आराधना का महापर्व है, जब मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इन नौ दिनों का शुभारंभ होता है। इस बार, अर्थात वर्ष 2026 में, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत एक विशेष ज्योतिषीय स्थिति के साथ हो रही है, जहाँ घटस्थापना का पवित्र कार्य कुछ ऐसे समय में संपन्न होने जा रहा है, जिसे सामान्यतः शुभ नहीं माना जाता। यह समय खरमास और पंचक का है, जिसका प्रभाव भक्तजनों के मन में अनेक प्रश्न उत्पन्न कर रहा है। आइए, इन ज्योतिषीय योगों का घटस्थापना और आगामी शुभ कार्यों पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।

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Navratri Ghatsthapana 2026: क्या अशुभ योगों के बीच होगी चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना?

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पूर्व शुभ-अशुभ मुहूर्त का विचार किया जाता है। चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना भी इन्हीं में से एक है, जिसका विशेष महत्व है। इस बार 2026 में, Navratri Ghatsthapana 2026 की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब सूर्य मीन राशि में गोचर कर रहे होंगे, जिसके कारण मीन खरमास चल रहा होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में सभी प्रकार के शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि वर्जित माने जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, पंचक काल का भी संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना जाता है। ऐसे में यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि इन अशुभ योगों का घटस्थापना और नवरात्रि के अन्य शुभ कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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घटस्थापना का महत्व और विधि

घटस्थापना नवरात्रि का एक अभिन्न अंग है, जिसके बिना नवरात्रि पूजन अधूरा माना जाता है। इसकी विधि इस प्रकार है:

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  • सबसे पहले, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।
  • एक मिट्टी का घड़ा लें और उसमें जल भरकर, उसके मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल स्थापित करें। नारियल को लाल वस्त्र से लपेट दें।
  • घड़े के नीचे जौ या सप्तधान्य बोएं।
  • घड़े को मिट्टी या धातु की चौकी पर स्थापित करें।
  • माता दुर्गा का आह्वान करें और उनसे नौ दिनों तक घर में निवास करने का आग्रह करें।
  • घट के पास अखंड ज्योत प्रज्वलित करें।
  • नियमित रूप से घट की पूजा करें और जौ में जल अर्पित करें।
यह भी पढ़ें:  आज का पंचांग: 10 मार्च 2026 के शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति

घटस्थापना 2026 शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना 2026: शुभ मुहूर्त (संभावित)

विवरणसमय
प्रतिपदा तिथि आरंभ08 अप्रैल 2026, बुधवार (प्रातः 06:15 बजे)
प्रतिपदा तिथि समाप्त09 अप्रैल 2026, गुरुवार (प्रातः 07:30 बजे)
घटस्थापना मुहूर्त08 अप्रैल 2026, बुधवार (प्रातः 06:19 से 07:28 तक)
अभिजीत मुहूर्त08 अप्रैल 2026, बुधवार (दोपहर 11:59 से 12:49 तक)
यह भी पढ़ें:  चैत्र नवरात्रि 2026: खरमास और पंचक में कलश स्थापना के नियम और प्रभाव

यह ध्यान रहे कि उपरोक्त मुहूर्त खरमास और पंचक के प्रभावों के अंतर्गत आ सकता है, जैसा कि ज्योतिषीय गणनाएं संकेत कर रही हैं।

खरमास और पंचक क्या हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है। वर्ष 2026 में, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत मीन खरमास के दौरान हो रही है, जो मार्च के मध्य से अप्रैल के मध्य तक रहेगा। इस दौरान सूर्य गुरु की राशि मीन में होता है, जिससे सूर्य का प्रभाव कमजोर पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। इसी प्रकार, पंचक पांच ऐसे नक्षत्रों का समूह होता है (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती) जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं। पंचक काल में कुछ विशेष कार्यों, जैसे यात्रा, लकड़ी खरीदना, छत डालना, दाह संस्कार आदि से बचना चाहिए। हालांकि, घटस्थापना जैसे धार्मिक कार्य पंचक में किए जा सकते हैं, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति की श्रद्धा और अनुष्ठान की पवित्रता पर निर्भर करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

क्या करें और क्या न करें

इन ज्योतिषीय स्थितियों के बावजूद, यह समझना महत्वपूर्ण है कि मां भगवती की आराधना में श्रद्धा और भक्ति ही सर्वोपरि है। यदि घटस्थापना खरमास या पंचक के दौरान करनी पड़ रही है, तो भक्तजन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। ज्योतिषियों का मत है कि देवी पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर खरमास का उतना गहरा प्रभाव नहीं पड़ता, जितना विवाह या गृह प्रवेश जैसे लौकिक कार्यों पर। पंचक में भी देवी पूजन वर्जित नहीं है।

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संकट निवारण हेतु उपाय

नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए इस मंत्र का जाप करें:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।।

संकट निवारण हेतु उपाय:

  • यदि आप खरमास या पंचक के प्रभाव को कम करना चाहते हैं, तो घटस्थापना से पूर्व भगवान गणेश का स्मरण करें।
  • संकट मोचन हनुमानजी की पूजा करें।
  • मां दुर्गा से प्रार्थना करें कि वे सभी बाधाओं को दूर करें और आपके पूजन को स्वीकार करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
  • ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

इन उपायों के साथ, पूर्ण विश्वास और पवित्र हृदय से की गई घटस्थापना निश्चित रूप से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करेगी।

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