back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 22, 2026
spot_img

छठ पूजा रूल्स: मासिक धर्म में व्रत और अर्घ्य के नियम

spot_img
- Advertisement -

Chhath Puja Rules: छठ महापर्व भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का एक ऐसा अनूठा संगम है, जहां प्रकृति की उपासना और सूर्य देव की आराधना का विशेष महत्व है। इस पावन अवसर पर व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। लेकिन कभी-कभी व्रतियों के मन में ऐसे प्रश्न उठते हैं, जिनका समाधान ज्योतिष और धर्मशास्त्र के आलोक में ही संभव है। जब छठ पूजा के दौरान व्रती को मासिक धर्म हो जाए, तो ऐसी स्थिति में व्रत के नियम क्या होने चाहिए और क्या अर्घ्य दिया जा सकता है, यह जानना अत्यंत आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

छठ पूजा रूल्स: मासिक धर्म में व्रत और अर्घ्य के नियम

छठ पूजा अत्यंत पवित्र और नियमनिष्ठ व्रत है, जिसमें स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। जब व्रती महिलाएं मासिक धर्म (माहवारी) की स्थिति में होती हैं, तो शास्त्रों में कुछ विशेष नियमों का विधान है, जिनका पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान व्रत को पूरी तरह से त्यागने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि कुछ विशेष सावधानियों के साथ इसे संपन्न किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

मासिक धर्म में छठ पूजा रूल्स का पालन कैसे करें?

धर्म शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, मासिक धर्म की स्थिति में स्त्रियों को अशुद्ध माना जाता है। ऐसे में छठ पूजा जैसे कठोर व्रत के दौरान निम्नलिखित नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है:

- Advertisement -
  • मासिक धर्म में व्रती स्वयं प्रत्यक्ष रूप से भगवान सूर्य को अर्घ्य नहीं दे सकती हैं। ऐसे में परिवार का कोई अन्य सदस्य, जैसे पति, बेटा, बेटी, या परिवार की कोई अन्य शुद्ध महिला, व्रती की ओर से अर्घ्य दे सकती है। व्रती इस दौरान दूरी बनाकर मानसिक रूप से पूजा में शामिल हो सकती हैं।
  • यदि घर में कोई अन्य सदस्य अर्घ्य देने के लिए उपलब्ध न हो, तो व्रती मानसिक रूप से सूर्य देव का ध्यान करते हुए अपने स्थान पर बैठकर पूजा कर सकती हैं। उन्हें पवित्र जल का स्पर्श नहीं करना चाहिए और न ही पूजा सामग्री को छूना चाहिए।
  • इस दौरान व्रती को अपनी सामान्य दिनचर्या में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की धार्मिक सामग्री या मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • कई स्थानों पर यह परंपरा भी है कि यदि मासिक धर्म छठ पूजा के प्रथम दिन (नहाय-खाय) या द्वितीय दिन (खरना) को आ जाए, तो अगले वर्ष तक व्रत को स्थगित कर दिया जाता है। हालांकि, यदि मासिक धर्म व्रत के मध्य में या अर्घ्य के दिनों में आता है, तो उपरोक्त नियमों का पालन करते हुए व्रत को जारी रखा जा सकता है।
  • विशेषज्ञों का मत है कि शारीरिक अशुद्धता के कारण मानसिक श्रद्धा में कमी नहीं आती। इसलिए व्रती अपने मन में सूर्य देव का ध्यान और व्रत का संकल्प बनाए रख सकती हैं।
यह भी पढ़ें:  चैती छठ 2026: सुख-समृद्धि और आरोग्य का पावन पर्व

छठ पूजा का मूल भाव शुद्ध हृदय और सच्ची निष्ठा से जुड़ा है। ऐसे में मासिक धर्म के दौरान भी यदि व्रती इन नियमों का पालन करती हुई अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं, तो उन्हें व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी प्रकार के भ्रम या संशय की स्थिति में किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य या पंडित से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

X का नया AI Feature: लंबे आर्टिकल्स की समरी अब एक क्लिक में!

AI Feature: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने अपने यूजर्स के लिए...

IPL 2024: Rohit Sharma ने मुंबई इंडियंस फैंस से किया बड़ा वादा, छठी ट्रॉफी जीतने का लिया संकल्प!

Rohit Sharma: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के नए सीज़न का बुखार चढ़ने लगा है,...

Automatic Climate Control: आपकी कार को बनाएगा और भी आरामदायक!

Automatic Climate Control: आधुनिक कारों में तकनीक का तेज़ी से विकास हो रहा है,...

IPL 2026 में 2000-3000 रन बनाएंगे वैभव सूर्यवंशी? युवा बल्लेबाज के मजेदार बयान से मचा तहलका

IPL 2026: भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने आगामी आईपीएल 2026 को...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें