
Chaiti Chhath 2026: चैती छठ महापर्व, जो सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना का महापर्व है, उसकी शुरुआत नहाए-खाए के साथ हो चुकी है, यह व्रत संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए रखा जाता है।
चैती छठ 2026: सुख-समृद्धि और आरोग्य का पावन पर्व
चैती छठ पर्व, वैदिक सनातन संस्कृति का एक अनुपम उदाहरण है, जो साल में दो बार मनाया जाता है – एक चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में। चैत्र माह में आने वाले इस पर्व को चैती छठ के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष, चैती छठ 2026 का शुभारंभ नहाए-खाए के साथ हो गया है, जिसमें पवित्रता और सादगी का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्तजन कद्दू-भात का सेवन कर स्वयं को शुद्ध करते हैं, जिसका धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से गहरा महत्व है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह महापर्व चार दिनों तक चलने वाला एक कठिन अनुष्ठान है, जो मन, वचन और कर्म की पवित्रता का प्रतीक है।
चैती छठ 2026: चार दिवसीय अनुष्ठान का विस्तृत विवरण
चैती छठ महापर्व का हर दिन विशेष पूजा विधि और नियमों से बंधा होता है। आइए जानते हैं इस चार दिवसीय अनुष्ठान के प्रत्येक चरण को विस्तार से:
- पहला दिन: नहाए-खाए (10 अप्रैल 2026, शुक्रवार)
इस दिन व्रती पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं। घर की साफ-सफाई की जाती है और व्रत के संकल्प के साथ सेंधा नमक, घी और कद्दू से बनी सब्जी व चावल का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इस दिन से ही व्रती पूर्ण सात्विक जीवनचर्या का पालन करते हैं। कद्दू-भात का सेवन शारीरिक शुद्धता के साथ-साथ व्रत के लिए मानसिक दृढ़ता भी प्रदान करता है।
- दूसरा दिन: खरना (11 अप्रैल 2026, शनिवार)
खरना का अर्थ है “शुद्धिकरण”। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यदेव को गुड़ और चावल से बनी खीर, पूड़ी व फलों का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। खरना के प्रसाद को बनाने में भी विशेष शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखा जाता है।
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (12 अप्रैल 2026, रविवार)
छठ पूजा का यह सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन व्रती जलाशयों (नदी, तालाब या घर में बनाए गए घाट) में खड़े होकर अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। बांस के सूप में ठेकुआ, चावल के लड्डू, फल, गन्ना, मूली, नींबू और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां सजाई जाती हैं। अर्घ्य देते समय छठी मैया और सूर्यदेव से संतान की सुरक्षा और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- चौथा दिन: उषा अर्घ्य (13 अप्रैल 2026, सोमवार)
व्रत का समापन चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है। व्रती पुनः उसी घाट पर जाकर सूर्योदय से पहले जल में खड़े हो जाते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास तोड़ते हैं। यह पर्व न केवल शारीरिक तपस्या का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और सूर्यदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है।
चैती छठ 2026: शुभ मुहूर्त
| पूजा का दिन | तिथि | सूर्य उदय | सूर्य अस्त |
|---|---|---|---|
| नहाए-खाए | 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार | प्रातः 05:54 | सायं 06:29 |
| खरना | 11 अप्रैल 2026, शनिवार | प्रातः 05:53 | सायं 06:30 |
| संध्या अर्घ्य | 12 अप्रैल 2026, रविवार | प्रातः 05:52 | सायं 06:31 |
| उषा अर्घ्य | 13 अप्रैल 2026, सोमवार | प्रातः 05:51 | सायं 06:32 |
(यह मुहूर्त अनुमानित हैं, स्थानीय पंचांग के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।)
सूर्यदेव और छठी मैया का महात्म्य
छठ महापर्व में सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व है क्योंकि वे प्रत्यक्ष देवता हैं और ऊर्जा तथा जीवन का स्रोत हैं। इसके साथ ही छठी मैया, जिन्हें ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्यदेव की बहन माना जाता है, की पूजा संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए की जाती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को अलौकिक शक्ति और मन की शांति प्राप्त होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
छठ पूजा मंत्र
ॐ मित्राय नमः। ॐ रवये नमः। ॐ सूर्याय नमः। ॐ भानवे नमः। ॐ खगाय नमः। ॐ पूष्णे नमः। ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। ॐ मरीचये नमः। ॐ आदित्याय नमः। ॐ सवित्रे नमः। ॐ अर्काय नमः। ॐ भास्कराय नमः।
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**निष्कर्ष:**
चैती छठ 2026 का यह पावन पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति सम्मान, सादगी और आत्म-अनुशासन का भी प्रतीक है। यह व्रत व्रती को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध करता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। इस महापर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।







