

Mahashivratri: शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का महापर्व, महाशिवरात्रि हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह वह पावन दिवस है जब भगवान शिव ‘तांडव’ करते हुए सृष्टि का सृजन, संरक्षण और संहार करते हैं, और इसी दिन माता पार्वती के साथ उनका विवाह भी संपन्न हुआ था।
महाशिवरात्रि 2026: 12 शुभ योग और 4 राजयोग में शिव-शक्ति का पावन पर्व
महाशिवरात्रि: शिव आराधना का महत्व और शुभ योग
इस वर्ष, 15 फरवरी के दिन यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा, जब कई दुर्लभ शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह दिन भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने, मनवांछित फल पाने और मोक्ष की कामना करने वाले साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पवित्र अवसर पर विशेष रूप से निशा काल में की गई पूजा-अर्चना अनंत पुण्यों की प्राप्ति कराती है।
महाशिवरात्रि का पावन पर्व शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन 12 शुभ योगों और 4 राजयोगों का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस **शुभ मुहूर्त** में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।
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महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना में इन नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ होता है:
* महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* पूजा का संकल्प लें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से अभिषेक करें।
* बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद फूल, फल, मिठाई अर्पित करें।
* चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं।
* धूप-दीप प्रज्वलित करें और शिव चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
* महाशिवरात्रि की कथा सुनें या पढ़ें।
* आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।
* निशा काल (रात्रि) में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का विभिन्न वस्तुओं से अभिषेक किया जाता है।
चार प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त (निशा काल)
| प्रहर | समय |
| :———— | :———————- |
| प्रथम प्रहर | शाम 06:14 बजे से रात्रि 09:25 बजे तक |
| द्वितीय प्रहर | रात्रि 09:25 बजे से मध्यरात्रि 12:36 बजे तक |
| तृतीय प्रहर | मध्यरात्रि 12:36 बजे से प्रातः 03:47 बजे तक |
| चतुर्थ प्रहर | प्रातः 03:47 बजे से सुबह 06:58 बजे तक |
महाशिवरात्रि व्रत पारण: 16 फरवरी, प्रातः 06:58 बजे के बाद।
कथा और महत्व
शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने सृष्टि का आरंभ किया था। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसी रात्रि को भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसलिए इस दिन शिव और शक्ति का मिलन होता है। यह रात भक्तों को शिव की शक्ति और करुणा का अनुभव करने का अवसर देती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पावन अवसर पर महादेव की उपासना से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मंत्र
महाशिवरात्रि पर इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है:
ॐ नमः शिवाय।
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
निष्कर्ष और उपाय
महाशिवरात्रि का पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि शिव ही सत्य हैं और शिव ही सुंदर हैं। इस दिन किया गया हर शुभ कर्म कई गुना फल प्रदान करता है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से महादेव की आराधना करते हैं, उनके जीवन से सभी प्रकार के दुख, दरिद्रता और रोग दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन रुद्राभिषेक करना, शिव महिम्न स्तोत्र या शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। महादेव की कृपा से जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
**उपाय:**
* महाशिवरात्रि के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं या दान दें।
* बेल वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं।
* जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
* ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।


