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मार्च, 2, 2026
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Phalguna Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा 2026 पर करें श्री लक्ष्मीनारायण पूजा, पाएं सुख-समृद्धि

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Phalguna Purnima 2026: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है, और फाल्गुन मास की पूर्णिमा तो और भी पवित्र मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव को समर्पित होता है, जब भक्तगण उपवास और पूजा-अर्चना करके विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।

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Phalguna Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा 2026 पर करें श्री लक्ष्मीनारायण पूजा, पाएं सुख-समृद्धि

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव और होलिका दहन के उपाय

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा-अर्चना से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। भक्तगण इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर अपने सभी कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं और मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। यह पावन पर्व होली के आगमन का भी प्रतीक है, जब होलिका दहन के माध्यम से नकारात्मक शक्तियों का नाश किया जाता है। इस दिन कई शुभ योग बनते हैं, जिनमें की गई पूजा विशेष फलदायी होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि

  • फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें और भगवान लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • संकल्प लेकर व्रत का आरंभ करें।
  • भगवान लक्ष्मीनारायण को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
  • उन्हें पीले वस्त्र, चंदन, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (खीर, फल, मिठाई) अर्पित करें।
  • सत्यनारायण कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
  • चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
  • शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।
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शुभ मुहूर्त

विवरणसमय
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ03 मार्च 2026, प्रातः 08:30 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त04 मार्च 2026, प्रातः 05:00 बजे
चंद्रोदय का समय03 मार्च 2026, सायं 06:15 बजे
होलिका दहन03 मार्च 2026, सायं 06:30 से 08:30 बजे तक

चंद्र ग्रहण का महत्व और प्रभाव

फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का होना इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। ग्रहण काल को धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्र जाप के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हालांकि, ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए। इस अवधि में दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए देवी-देवताओं का स्मरण करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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मंत्र

चंद्र ग्रहण के दौरान और फाल्गुन पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।

होलिका दहन के विशेष उपाय

  • होलिका दहन की अग्नि में पुरानी बुराइयों और नकारात्मक विचारों को जला दें।
  • एक नारियल को अपने ऊपर से सात बार घुमाकर होलिका की अग्नि में अर्पित करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।
  • होलिका की राख को घर लाकर माथे पर लगाने से बुरी नजर से बचाव होता है।
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निष्कर्ष और उपसंहार

फाल्गुन पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें अध्यात्म, शुद्धता और सकारात्मकता की ओर अग्रसर करता है। इस दिन किए गए व्रत, पूजा और उपाय जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति प्रदान करते हैं। भगवान लक्ष्मीनारायण की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन आनंदमय बनता है। यह दिन होलिका दहन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है, जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

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