back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 17, 2026
spot_img

देवघर में होली 2026: हरिहर मिलन और चंद्रग्रहण के अद्वितीय संयोग… पढ़िए अलौकिक अनुभव

spot_img
- Advertisement -

Holi 2026: देवभूमि देवघर में होली का आगमन सदैव ही एक अलौकिक अनुभव होता है, परंतु वर्ष 2026 में यह पर्व कुछ विशेष ज्योतिषीय संयोगों और प्राचीन परंपराओं के अद्भुत मेल के साथ तीन दिवसीय उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

- Advertisement -

देवघर में होली 2026: हरिहर मिलन और चंद्रग्रहण के अद्वितीय संयोग

फाल्गुन पूर्णिमा पर, जब पूरे देश में रंगों का उल्लास छा जाता है, तब झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में होली का पर्व अपने निराले अंदाज में मनाया जाता है। इस वर्ष होली 2026 का पर्व 2 मार्च से 4 मार्च तक तीन दिनों के विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें हरिहर मिलन और होलिका दहन की गौरवशाली परंपराएं चंद्रग्रहण के दुर्लभ खगोलीय घटनाक्रम के बीच संपन्न होंगी। यह संयोग अपने आप में अत्यंत दुर्लभ और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

- Advertisement -

देवघर में होली 2026: एक दिव्य ज्योतिषीय पर्व

देवघर में होली की शुरुआत किसी सामान्य उत्सव की तरह नहीं होती, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय संयोग के साथ आरंभ होती है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण का होना, हरिहर मिलन और होलिका दहन जैसी पवित्र परंपराओं के साथ एक अद्भुत और शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण करेगा। मान्यता है कि ऐसे विशेष खगोलीय योग में किए गए पूजन और अनुष्ठान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अद्वितीय संयोग का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। देवघर में हरिहर मिलन की परंपरा भगवान शिव और विष्णु के एकात्म स्वरूप का प्रतीक है, जो इस पावन अवसर पर और भी अधिक विशिष्ट हो जाती है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Masik Shivratri: 17 मार्च को मासिक शिवरात्रि पर शिव कथा का आध्यात्मिक महत्व... पढ़िए...शिकारी और हिरण की पौराणिक कथा और सार

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

होली 2026: हरिहर मिलन और होलिका दहन की परंपरा

देवघर में होली का उत्साह हरिहर मिलन से शुरू होता है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भगवान शिव और विष्णु के प्रतीक विग्रहों का मिलन कराकर उन्हें गुलाल अर्पित किया जाता है, जो एकता और सद्भाव का संदेश देता है। इसके बाद, होलिका दहन की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। वर्ष 2026 में यह होलिका दहन चंद्रग्रहण के दौरान होने से इसका आध्यात्मिक आयाम और भी गहरा हो जाएगा। हालांकि चंद्रग्रहण को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, परंतु देवघर में बाबा बैद्यनाथ की महिमा के कारण यहां की परंपराएं इन खगोलीय घटनाओं के बीच भी अविचलित रूप से निभाई जाती हैं। यह एक प्रकार से प्रकृति और परमात्मा के समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।

होलिका दहन पूजा विधि

  • होलिका दहन से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • एक थाली में रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, बताशे, गुलाल, नारियल और जल का लोटा रखें।
  • होलिका के समीप जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • गणेश जी और अपने इष्ट देव का स्मरण करें।
  • होलिका को रोली, अक्षत, फूल अर्पित करें।
  • कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार लपेटें और परिक्रमा करें।
  • अंत में जल का लोटा अर्पित करें और अपनी मनोकामनाएं मांगें।
यह भी पढ़ें:  सरहुल 2026: प्रकृति और संस्कृति का अनुपम संगम

होलिका दहन 2026: शुभ मुहूर्त

पर्वदिनांकसमय (भारतीय समयानुसार)
फाल्गुन पूर्णिमा प्रारंभमंगलवार, 3 मार्च 2026प्रातः 09:50 बजे
फाल्गुन पूर्णिमा समाप्तबुधवार, 4 मार्च 2026प्रातः 06:18 बजे
होलिका दहन (चंद्रग्रहण काल के मध्य)मंगलवार, 3 मार्च 2026सायं 06:45 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक (संभावित)
चंद्रग्रहण (आंशिक उपच्छाया)मंगलवार, 3 मार्च 2026सायं 03:53 बजे से रात्रि 08:26 बजे तक (देवघर समयानुसार)

होलिका दहन की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप को यह पसंद नहीं था और उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह अग्नि से नहीं जलेगी। परंतु भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहा और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और अहंकार पर भक्ति की विजय का प्रतीक है। देवघर में होली का यह पर्व अपने गहरे धार्मिक महत्व और परंपराओं के साथ मनाया जाएगा।

होलिका दहन मंत्र

ॐ ह्रीं ह्रीं होलिका देव्यै नमः।
अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलिकया यतः।
अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।।

**निष्कर्ष और उपाय**

यह भी पढ़ें:  Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा की सवारी, घटस्थापना और हिंदू नववर्ष का शुभ आगमन

देवघर में होली 2026 का यह तीन दिवसीय उत्सव, विशेष रूप से हरिहर मिलन और चंद्रग्रहण के बीच होलिका दहन का अनुष्ठान, भक्तों के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर आएगा। इस दौरान भगवान शिव और विष्णु की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का यह एक दुर्लभ अवसर होगा। जो भक्त इस पवित्र समय में बाबा बैद्यनाथ धाम में उपस्थित होकर इन परंपराओं का निर्वहन करेंगे, उन्हें कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य करना और भगवान का स्मरण करना विशेष फलदायी माना गया है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

The Kerala Story 2 Box Office: ‘द केरल स्टोरी 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, जानें 18वें दिन का कलेक्शन!

The Kerala Story 2 Box Office News: सिनेमाघरों में धमाल मचा रही 'द केरल...

Masik Shivratri 2026: जानिए महादेव की पूजा का शुभ समय और विधि

Masik Shivratri 2026: शिव भक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि का पर्व अत्यंत पावन और...

Poco X8 Series का धमाका: दमदार फीचर्स के साथ आ रहे Poco X8 Pro 5G और Pro Max 5G

Poco X8 Series: तकनीकी दुनिया में हलचल मचाने को तैयार Poco X8 Pro 5G...

आरईसी लिमिटेड का बड़ा ऐलान: निवेशकों के लिए चौथी बार बंपर डिविडेंड की घोषणा!

डिविडेंड: भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वाले हर निवेशक की निगाहें अक्सर उन...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें