

Fashion Designing: आज के दौर में फैशन इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और इसने खुद को सिर्फ एक शौक से बदलकर एक प्रोफेशनल और ग्लैमरस करियर विकल्प के रूप में स्थापित कर लिया है। यदि आप 12वीं के बाद कुछ रचनात्मक करना चाहते हैं, डिजाइनिंग में रुचि रखते हैं और नए ट्रेंड्स के साथ काम करना पसंद करते हैं, तो फैशन डिजाइनिंग आपके लिए एक उत्कृष्ट क्षेत्र हो सकता है। सही शिक्षा, सही संस्थान और उचित मार्गदर्शन मिलने पर इस क्षेत्र में आप एक बड़ा नाम कमा सकते हैं।
फैशन डिजाइनिंग: 12वीं के बाद एक उज्ज्वल और आकर्षक करियर
फैशन डिजाइनिंग: 12वीं के बाद बेहतरीन करियर विकल्प
आज के समय में फैशन सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व और जीवनशैली का प्रतिबिंब बन चुका है। युवा पीढ़ी के लिए यह क्षेत्र नए अवसर और रचनात्मकता की असीमित संभावनाएं लेकर आया है। एक सफल फैशन डिजाइनर बनने के लिए न केवल कल्पनाशील होना जरूरी है, बल्कि बाजार की समझ और तकनीकी ज्ञान भी आवश्यक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फैशन डिजाइनिंग में करियर बनाने के लिए सबसे पहला कदम सही Fashion Design Courses का चयन करना है, जो आपके कौशल को निखार सके।
पात्रता और प्रवेश प्रक्रिया
पात्रता
- छात्र का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
- किसी भी स्ट्रीम (कला, वाणिज्य या विज्ञान) के छात्र इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया
देश के प्रमुख डिजाइन संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होती है।
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है।
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) में दाखिले के लिए NID DAT परीक्षा देनी होती है।
- कुछ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) में भी डिजाइन से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें प्रवेश के लिए UCEED जैसी परीक्षा देनी होती है।
- इन परीक्षाओं में छात्रों की रचनात्मक सोच, ड्राइंग स्किल, सामान्य ज्ञान और डिजाइन समझ का मूल्यांकन किया जाता है।
फैशन डिजाइनिंग की फीस संस्थान के प्रकार पर निर्भर करती है। सरकारी संस्थानों में सालाना फीस लगभग 1 से 3 लाख रुपये के बीच हो सकती है, जबकि निजी संस्थानों में यह फीस 3 से 6 लाख रुपये प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है। पूरे चार साल के कोर्स में कुल खर्च 5 से 20 लाख रुपये तक हो सकता है। कई संस्थान मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान करते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हो सकता है और शिक्षा तक पहुंच आसान हो जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पाठ्यक्रम का स्वरुप और भविष्य के अवसर
फैशन डिजाइनिंग कोर्स में सिर्फ कपड़ों की डिजाइनिंग ही नहीं सिखाई जाती, बल्कि डिजाइन के तकनीकी और व्यावसायिक पहलुओं पर भी गहनता से ध्यान दिया जाता है। छात्रों को फैशन इलस्ट्रेशन, पैटर्न मेकिंग, गारमेंट कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल्स, कंप्यूटर एडेड डिजाइन (CAD), फैशन हिस्ट्री, ट्रेंड एनालिसिस और पोर्टफोलियो डेवलपमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके साथ ही इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्रोजेक्ट वर्क भी कराया जाता है, ताकि छात्र वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
डिग्री पूरी करने के बाद अधिकतर छात्र इंटर्नशिप के जरिए अपने करियर की शुरुआत करते हैं। फैशन डिजाइनर के रूप में नौकरी के अवसर गारमेंट कंपनियों, फैशन ब्रांड्स, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और फिल्म इंडस्ट्री में मिल सकते हैं। कई छात्र अपना खुद का फैशन लेबल भी शुरू करते हैं, जो उन्हें रचनात्मक स्वतंत्रता प्रदान करता है। Zara और H&M जैसे बड़े ब्रांड्स में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा, मनीष मल्होत्रा जैसे प्रसिद्ध डिजाइनरों के साथ काम करने का मौका भी मिल सकता है, जिससे अनुभव और पहचान दोनों मिलती हैं।
फैशन डिजाइनिंग में शुरुआती सैलरी 2.5 से 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष के बीच होती है। अनुभव और कौशल के आधार पर यह वेतन 8 से 10 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। यदि कोई डिजाइनर अपना ब्रांड स्थापित कर लेता है या बड़े फैशन हाउस के साथ काम करता है, तो आय की कोई सीमा नहीं रहती। फैशन इंडस्ट्री में हर साल नए ट्रेंड्स आते हैं, जिससे इस क्षेत्र में हमेशा नए अवसर बने रहते हैं और करियर की संभावनाएं असीमित रहती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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