

Bokaro News: जैसे एक छोटा सा दीया घने अंधेरे को चीर देता है, वैसे ही झारखंड के एक छोटे से पंचायत ने देश के सामने एक बड़ी मिसाल पेश की है। अपने लो-कार्बन विकास मॉडल से सियारी पंचायत ने न सिर्फ स्थानीय समस्याओं का समाधान किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान भी बना ली है। जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत आने वाली सियारी पंचायत की यह कहानी दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई है।
Bokaro News: मुंबई क्लाइमेट वीक में गूंजा सियारी का नाम
झारखंड के बोकारो जिले की सियारी पंचायत ने अपने अभिनव और पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल के दम पर राष्ट्रीय मंच पर धूम मचा दी है। हाल ही में मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित क्लाइमेट वीक 2026 के दौरान पंचायत की इस अनूठी पहल को देशभर से आई सराहना मिली। जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “पंचायत लीडिंग इंडियाज क्लाइमेट चार्ज” नामक सत्र में सियारी पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने अपने कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस सत्र में झारखंड के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने बताया कि पंचायत ने किस तरह स्थानीय चुनौतियों को अवसर में बदला। उन्होंने बताया कि इलाके में बिजली की लगातार कटौती एक बड़ी समस्या थी, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। “कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत” कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर पंचायत ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड का सदुपयोग करने का निर्णय लिया और 72 सोलर स्ट्रीट लाइटें स्थापित करवाईं।
सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
पंचायत ने केवल सड़कों को ही रोशन नहीं किया, बल्कि शिक्षा और सामुदायिक जीवन को भी सौर ऊर्जा से जोड़ा। विद्यालयों एवं सामुदायिक भवनों में सोलर सिस्टम लगाए गए, ताकि बिजली कटौती का असर इन महत्वपूर्ण संस्थानों पर न पड़े। इसके अलावा, खेती-किसानी की एक बड़ी समस्या का समाधान करते हुए पंचायत के मुख्य तालाब पर सोलर आधारित लिफ्ट सिंचाई पंप स्थापित किया गया। इस एक कदम से डीजल और अनियमित बिजली पर किसानों की निर्भरता काफी हद तक कम हो गई, जिससे न केवल आर्थिक बचत हुई बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
सियारी पंचायत का विकास मॉडल सिर्फ सौर ऊर्जा तक ही सीमित नहीं है। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड की मदद से पंचायत क्षेत्र में कई अन्य विकास कार्य भी किए गए हैं। पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए बिरसा मुंडा बागवानी मिशन के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। इस अभियान में 2,880 आम के पौधे तथा 800 अन्य फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पूरी यात्रा में पंचायत हेल्प डेस्क ने योजनाओं के सही चयन और तकनीकी सहयोग प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह संपूर्ण पहल पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप, दामोदर बचाओ अभियान एवं कॉमन ग्राउंड इनिशिएटिव के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे “कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत” कार्यक्रम का एक हिस्सा है।
उपायुक्त ने की सराहना, बताया प्रेरणास्रोत
सियारी पंचायत की इस शानदार उपलब्धि पर जिले के उपायुक्त अजय नाथ झा ने मुखिया रामवृक्ष मुर्मू और उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जलवायु के अनुकूल विकास की यह पहल वाकई काबिले-तारीफ है और यह जिले की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत का काम करेगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे सभी नवाचारों को पूरा प्रोत्साहन देगा। यह पहल साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो छोटे स्तर पर भी बड़े और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।

