
फिलहाल शपथ दिलाने की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। इसी बैठक में एकीकृत दिल्ली नगर निगम के पहले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव होने हैं। वहीं, कांग्रेस ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी।
MCD मेयर चुनाव (Mayor Election) के दौरान आम आदमी पार्टी (Aam aadmi party) और बीजेपी (BJP) के पार्षद (councillors ) आपस में भिड़ गए। दरअसल, AAP पार्षदों ने पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के उस फैसले पर हंगामा किया जिसके तहत मनोनीत सदस्यों को पहले शपथ दिलाई गई थी।
दिल्ली नगर निगम के महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव आज होना है। एमसीडी चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ने पार्षद शैली ओबेरॉय को मेयर प्रत्याशी बनाया है जबकि भाजपा की ओर से रेखा गुप्ता मैदान में हैं।
अब अगली बैठक कब होगी इसका फैसला एलजी के हाथ में है। शनिवार और रविवार को निगम की छुट्टी होती है, सोमवार को फिर से सदन की बैठक करने का निर्णय हो सकता है। मेयर चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल तक भी टाली जा सकती है।
जानकारी के अनुसार,वहीं मतदान से पहले ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। दिल्ली में शुक्रवार को नवनिर्वाचित दिल्ली नगर निगम (MCD) की पहली बैठक में उपराज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा 10 ‘एल्डरमैन’ (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ गए। बैठक की शुरुआत भाजपा पार्षद सत्य शर्मा को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के महापौर और उप महापौर पद के चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी के रूप में शपथ दिलाने के साथ हुई।
शर्मा के ‘एल्डरमैन’ मनोज कुमार को शपथ लेने के लिए आमंत्रित करने पर ‘आप’ के विधायक और पार्षद विरोध करने लगे। कई विधायक और पार्षद नारे लगाते हुए सदन में आसन के करीब पहुंच गए। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में ‘आप’ के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए। ‘आप’ ने आरोप लगाया कि सक्सेना ने उन भाजपा नेताओं को ‘एल्डरमेन’ नियुक्त किया है, जिन्हें नागरिक मुद्दों में विशेषज्ञता हासिल नहीं है।
हंगामे पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बीजेपी पर हमला बोला है। सिसोदिया ने कहा कि एमसीडी में अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए बीजेपी वाले और कितना गिरोगे। वे चुनाव टाले, पीठासीन अधिकारी की गैरकानूनी नियुक्ति, मनोनीत पार्षदों की गैरकानूनी नियुक्ति और अब जनता के चुने पार्षदों को शपथ न दिलवाना। अगर जनता के फैसले का सम्मान नहीं कर सकते तो फिर चुनाव ही किसलिए।







