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फ़रवरी, 25, 2026
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19 वर्षों बाद पवित्र श्रावण मास के बीच कल 18 जुलाई से लगेगा मलमास, क्या करें, क्या है वर्जित

यस्मिन चांद्रे न संक्रान्ति: सो अधिमासो निगह्यते तत्र मंगल कार्यानि नैव कुर्यात कदाचन्

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श्रावणी मेला के अवसर पर 19 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पवित्र श्रावण मास के बीच मलमास (पुरुषोत्तम मास) का संयोग लगा है। वही श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी जो आमावस्या तिथि पर पड़ने के कारण विशेष महत्व का दिन हो जा रहा है।

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साथ ही सोमवार को ही कर्क संक्रांति भी है। अनूठे संयोग के बीच 18 जुलाई से बाबानगरी में बांग्ला श्रावण की भी शुरूआत हो जाएगी। मलमास (पुरुषोत्तम मास) और बांग्ला श्रावण एक साथ निरंतर एक मास 16 अगस्त तक चलेगा। मलमास मेला समापन के उपरांत 17 से 31 अगस्त तक पुन: श्रावणी मेला का दूसरा पखवारा निरंतर चलेगा।

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भारतीय ज्योतिष के अनुसार हर तीन साल पर अधिकमास यानी मलमास आते हैं। इस साल मलमास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। इन दिनों में कुछ कार्य करने से जहां पुण्य की प्राप्ति होती है, वहीं कुछ कार्यों से परहेज बरतने को भी कहा जाता है।

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अधिक मास को पुरुषोत्तम मास, मलमास के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस पुरुषोत्तम मास का बड़ा ही महत्व बताया गया है। मलमास के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य करने की मनाही होती है।

कहा भी गया है-यस्मिन चांद्रे न संक्रान्ति: सो अधिमासो निगह्यते तत्र मंगल कार्यानि नैव कुर्यात कदाचन्। अर्थात् जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई भी संक्रांति नहीं होती है, उसे अधिक मास कहते हैं। इस समय किसी भी तरह के शुभ कार्य, जैसे-मुंडन, विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण या किसी भी तरह की नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए।

इस साल विक्रम संवत् 2080 में चांद श्रावण मास 18 जुलाई मंगलवार से 16 अगस्त बुधवार सन् 2023 ई॰ तक अधिकमास (मल मास) रहेगा। जिस महीने में सूर्य की संक्रांति न हो, वह महीना अधिकमास और जिसमें दो संक्रांति हो, वह क्षयमास कहलाता है।

ज्योतिष गणित के अनुसार एक सौर वर्ष का मान 365 दिन 6 घंटे और 99 सेकंड के लगभग है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिन और 8 घंटे का होता है। दोनों वर्षमानों में प्रति वर्ष 10 दिन 28 घंटे 9 मिनट का अंतर पड़ जाता है। इस अंतर में सामंजस्य स्थापित करने के लिए 32 महीने 16 दिन, 4 घंटे बीत जाने पर अधिकमास का निर्णय किया जाता है।

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मलमास के दौरान पूजा करने वाले लोगों को आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और उनके घर में सुख-शांति बनी रहती है। बता दें कि इस महीने में भगवान पुरुषोत्तम की उपासना करने वाले को हर प्रकार के सुख-साधनों की प्राप्ति होती है।

अधिक मास के दौरान शहद, चौलाई, उड़द, राई, प्याज, लहसुन, गोभी, गाजर, मूली, दाल, तिल का तेल और नागरमोथा आदि का त्याग करना चाहिए। इन सब चीजों का सेवन इस महीने के दौरान आपके द्वारा किए गए पुण्य को समाप्त कर देगा।

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लिहाजा अधिक मास में इन सब चीजों के सेवन से बचना चाहिए। इसले अलावा पुरुषोत्तम महीने के दौरान गेहूं, चावल, सफेद धान, मूंग, जौ, तिल, मटर, बथुआ, सामक, ककड़ी, केला, घी, कटहल, आम, पीपल, जीरा, सोंठ, इमली, सुपारी, आंवला, सेंधा नमक आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही अगर हो सके तो इस महीने के दौरान नीचे भूमि पर शयन करना चाहिए और केवल एक ही समय भोजन करना चाहिए।

पुरुषोत्तम मास 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक रहेगा। इसके अलावा पुरुषोत्तम महीने के दौरान भगवान के इस मंत्र का भी नित्य रूप से जप करना चाहिए। मंत्र है- गोवर्धन धरं वन्दे गोपालं गोपरुपिणं। गोकुलोत्सव मीशानं गोविन्द गोपिकाप्रियं।। इस मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा उस व्यक्ति पर बनी रहती है और उसके सारे काम बिना किसी विघ्न के पूरे हो जाते हैं।

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