
Nepal Prime Minister: राजनीति की बिसात पर बिछी नई चाल, जहां भाषाओं और संस्कृतियों के सेतु पर चलकर एक नया अध्याय लिखा जा रहा है, और इस बार पड़ोसी देश नेपाल में बिहार के लिए एक गौरव का क्षण दस्तक दे रहा है। नेपाल के आगामी प्रधानमंत्री के रूप में मैथिली भाषी बालेन शाह का नाम सामने आना, बिहार के लोगों के लिए विशेष मायने रखता है। यह केवल एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति के रिश्ते की एक नई पहचान है। ऐसा नहीं है कि नेपाल में मैथिलीभाषियों का शीर्ष पदों पर पहुंचना बिलकुल नया है।
नेपाल में पहला मैथिली भाषी Nepal Prime Minister बनने की राह
दरअसल, 2008 में जब नेपाल को गणतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया, तब जुलाई में हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में रामबरन यादव राष्ट्रपति और परमानंद झा उपराष्ट्रपति चुने गए थे। ये दोनों ही नेता मैथिली भाषी थे। दिलचस्प बात यह है कि उपराष्ट्रपति परमानंद झा का जन्म तो बिहार के दरभंगा जिले में हुआ था। जब वे उपराष्ट्रपति चुने गए, तो उन्होंने हिंदी में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर सभी को चौंका दिया। यह मामला नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जिसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप से परमानंद झा ने नेपाली और मैथिली, दो भाषाओं में शपथ ली। नेपाल के इतिहास में यह पहली बार था कि पद और गोपनीयता की शपथ दो भाषाओं में दिलाई गई।
बिहार से सटे नेपाल का मधेश प्रांत और भाषाई सौहार्द
नेपाल, हिमालय की गोद में बसा एक बहुभाषी राष्ट्र है, जहां हिंदी, मैथिली और भोजपुरी बोलने वालों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। भौगोलिक रूप से इसे हिमालयी क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्र और तराई क्षेत्र में बांटा गया है। तराई क्षेत्र, जो पहाड़ों की तलहटी में स्थित मैदानी भाग है, अपनी उपजाऊ भूमि और कृषि उत्पादन के लिए विख्यात है। देश की अन्न सुरक्षा काफी हद तक इसी तराई क्षेत्र पर निर्भर करती है। नेपाल के कुल 77 जिलों में से 56 जिले हिमालयी और पर्वतीय क्षेत्रों में पड़ते हैं, जबकि शेष 21 जिले तराई क्षेत्र का हिस्सा हैं। इन्हीं 21 जिलों में से 8 जिलों को मिलाकर 2015 में मधेश प्रांत (पूर्व में प्रांत संख्या 2) का गठन किया गया था, जिसकी राजधानी जनकपुर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मधेश शब्द का शाब्दिक अर्थ देश का मध्य भाग है।
मधेश प्रांत के परसा और चितवन जिले बिहार के पश्चिमी और पूर्वी चंपारण जिलों से सटे हुए हैं। चूंकि चंपारण क्षेत्र में भोजपुरी बोली जाती है, स्वाभाविक रूप से नेपाल के इन सीमावर्ती जिलों में भी भोजपुरी का चलन है। भले ही भौगोलिक सीमाएं अलग हों, लेकिन इन क्षेत्रों की बोली और संस्कृति में अद्भुत समानता है। सदियों से यहां के लोगों में भाईचारा और अपनत्व का रिश्ता कायम है। दोनों तरफ के समुदायों के बीच विवाह संबंध भी आम हैं, और तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ावों के बावजूद आज भी बारातें आती-जाती रहती हैं, जो मजबूत भारत-नेपाल संबंध का प्रतीक है।
इसी तरह, मधेश प्रांत के धनुषा और महोत्तरी जिले बिहार के सीतामढ़ी और मधुबनी जिलों से मिलते हैं। मधुबनी और सीतामढ़ी में मैथिली का प्रभुत्व है, और यही वजह है कि नेपाल के इन सटे हुए जिलों में भी मैथिली भाषी आबादी अधिक है। बिहार और नेपाल के मैथिली भाषी लोगों के बीच भी गहरे विवाह संबंध हैं। मधेश प्रांत के आठों जिलों में प्रमुख रूप से हिंदी भी बोली जाती है। हालांकि, नेपाली भाषी लोगों पर अक्सर मधेशियों के साथ राजनीतिक और सामाजिक भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं।
बालेन शाह और उनकी मैथिली विरासत
जेन जी आंदोलन के लोकप्रिय युवा नेता बालेन शाह, जिन्होंने हाल के चुनाव (राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी) में प्रचंड जीत दर्ज की है, अब नेपाल के प्रधानमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं। मैथिली भाषी पहले भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे गरिमामय पदों पर आसीन हो चुके हैं, लेकिन यह पहला अवसर होगा जब कोई मैथिली भाषी नेपाली नागरिक प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालेगा। बालेन शाह का जन्म भले ही काठमांडू में हुआ हो, किंतु उनके माता-पिता महोत्तरी जिले के मूल निवासी हैं। महोत्तरी जिला मधेश प्रांत का अभिन्न अंग है और बिहार के सीतामढ़ी तथा मधुबनी जिलों से इसकी सीमाएं मिलती हैं। सीतामढ़ी और मधुबनी की तरह महोत्तरी में भी मैथिली भाषा प्रमुखता से बोली जाती है।
बालेन शाह के पिता राम नारायण शाह और मां ध्रुवदेवी शाह महोत्तरी के मूल निवासी होने के कारण मैथिली बोलते हैं। बाद में यह परिवार काठमांडू में बस गया। बालेन शाह का जन्म काठमांडू में हुआ, लेकिन घर में मैथिली का माहौल होने के कारण उनकी भी मातृभाषा मैथिली ही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह भाषाई जुड़ाव दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक पुल को और मजबूत करता है।
भारतीय शिक्षा से पोषित नेपाली राजनीतिक सितारे
नेपाल की राजनीति में शीर्ष मुकाम हासिल करने वाले इन तीन प्रमुख मैथिली भाषी हस्तियों में एक महत्वपूर्ण समानता है: इन सभी की शिक्षा का कुछ अंश भारत में पूरा हुआ है। बालेन शाह ने बेंगलुरु के निट्टे मीनाक्षी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमटेक की पढ़ाई की है। पूर्व राष्ट्रपति रामबरन यादव ने कोलकाता के मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की डिग्री हासिल की और बाद में चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उपराष्ट्रपति परमानंद झा की प्राथमिक शिक्षा उनके मामा के घर बिहार के दरभंगा में हुई। बाद में वे नेपाल लौट आए, जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की और नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
उपराष्ट्रपति परमानंद झा का ननिहाल बिहार के दरभंगा में था। उनकी माता का विवाह नेपाल में हुआ था, और वे तथा उनके पिता दोनों ही नेपाली नागरिक थे जो नेपाल के मिथिला क्षेत्र में निवास करते थे। इस प्रकार, परमानंद झा ने एक मैथिली भाषी नेपाली के रूप में उपराष्ट्रपति का संवैधानिक पद प्राप्त किया। पूर्व राष्ट्रपति रामबरन यादव का जन्म नेपाल के धनुषा जिले के सिपही गांव में हुआ था, जिसकी सीमा बिहार के मधुबनी जिले से मिलती है, जहां मैथिली भाषा प्रचलित है। और अब, मधुबनी से सटे नेपाल के महोत्तरी जिले के मूल निवासी बालेन शाह, प्रधानमंत्री पद की ओर अग्रसर हैं, जो भारत-नेपाल संबंध को और प्रगाढ़ करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



