
बिहार में होने वाले नगर निकाय चुनाव को स्थगित कर दिया गया है। नगर निकाय चुनाव को न्यायालय के आदेश के आलोक में राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 और 20 अक्टूबर 2022 को होने वाले मतदान को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, अब दिसंबर में चुनाव होने की संभावना है। लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मतदान तिथि को स्थगित किया गया है, अगली तिथि निर्धारित की जाएगी।
बिहार में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार देर रात बैठक के बाद 10 और 20 अक्टूबर को होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। दूसरी डेट बाद में जारी की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग के अफसरों ने 8 घंटे बैठक की। इसके बाद यह निर्णय लिया।
इसके पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए 20 प्रतिशत आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी कर नए सिरे से नोटिफिकेशन जारी करें। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से कहा गया कि वह मतदान की तारीख आगे बढ़ाना चाहे, तो बढ़ा सकता है।
इस फैसले के साथ ही 10 और 20 अक्टूबर को होने वाली नगरपालिका चुनाव पर फिलहाल रोक लग गई है। फिलहाल, राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से इस संबंध में नया नोटिफिकेशन जारी होगा।
इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को बिहार में चल रहे नगर निकाय चुनाव पर रोक लगा दिय। हाईकोर्ट ने कहा है कि बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन नहीं किया है।
जानकारी के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 और 20 अक्टूबर को होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। दूसरी डेट बाद में जारी की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग के अफसरों ने 8 घंटे बैठक की। इसके बाद यह निर्णय लिया।
इसके पहले पटना हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए 20 प्रतिशत आरक्षित सीटों को जनरल कर नए सिरे से नोटिफिकेशन जारी करें। पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और एस कुमार की बेंच ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि राज्य निर्वाचन आयोग मतदान की तारीख को आगे बढ़ाना चाहे तो वह बढ़ा सकता है।


इधर, पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए बिहार सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी। दरअसल, हाईकोर्ट ने फिर से अधिसूचना के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद 10 और 20 अक्टूबर का चुनाव स्थगित कर दिया गया है। कोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में ही स्पष्ट किया था कि किसी भी स्थानीय निकाय चुनाव में पिछडे वर्ग को आऱक्षण से पहले सरकार ट्रिपल टेस्ट कराये और उसके आधार पर चुनाव कराये।
वहीं, नगरपालिका चुनाव में बगैर ट्रिपल टेस्ट के पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया गया था। इसे चुनौती देते हुए सुनील कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। गुरुवार को इस मामले पर आखिरी सुनवाई हुई थी और मंगलवार को इस पर फैसला सुनाया गया।
पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि राज्य चुनाव आयोग, ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी की सीटों के रूप में मानते हुए फिर से चुनाव की अधिसूचना जारी करे। इसके बाद चुनाव कराया जाए। ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है।
राज्य निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त और स्वतंत्र निकाय के रूप में अपने कामकाज की समीक्षा करे, वह बिहार सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है।
बिहार राज्य सरकार स्थानीय निकायों, शहरी या ग्रामीण चुनावों में आरक्षण से संबंधित एक व्यापक कानून बनाने पर विचार कर सकती है, ताकि राज्य को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप लाया जा सके।





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