India Monsoon News: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर अपना दूसरा दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। यह खबर देश के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि इस साल मॉनसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई गई है।
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मौसम विभाग के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के दौरान देश में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालीन औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर, देश में मॉनसून के दौरान औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। IMD के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे अधिक, यानी 84 प्रतिशत है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन और IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने इस पूर्वानुमान को साझा करते हुए चेतावनी दी कि कम वर्षा के कारण खेती, जल संकट और भीषण गर्मी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
India Monsoon News: मॉनसून की कमी का क्षेत्रीय असर और जल संकट
डॉ. रविचंद्रन के मुताबिक, देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी प्रायद्वीपीय इलाकों और पूर्वी-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। अन्य क्षेत्रों के लिए, स्थिति चिंताजनक है:
- उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 46 प्रतिशत है।
- मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 43 प्रतिशत है।
- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी कम बारिश की संभावना 45 प्रतिशत है।
- पूर्वोत्तर भारत में सामान्य और सामान्य से कम बारिश की संभावना है।
जून 2026 में भी देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है, केवल उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना है। कम बारिश का सीधा असर खेती, जलाशयों के जलस्तर, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर पड़ेगा। इससे सूखे और गर्मी की स्थिति भी गंभीर हो सकती है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की आशंका है।
पूरे देश में भीषण गर्मी और लू का कहर
IMD ने चेतावनी दी है कि जून 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। इसके साथ ही कई राज्यों में लू के दिनों की संख्या भी बढ़ सकती है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लू का खतरा सबसे ज़्यादा है। हालांकि, राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू पड़ने की संभावना जताई गई है, जो कुछ राहत की बात है।
विभाग ने प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित होने के आसार भी बताए हैं, जो आमतौर पर भारत में मॉनसून को कमजोर करता है। वहीं, हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) फिलहाल तटस्थ स्थिति में बना हुआ है। सचिव डॉ. रविचंद्रन ने राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को गर्मी और जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी करने की सलाह दी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे तेज़ धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पीएं और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
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