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Patna High Court के न्यायाधीश अनिल उपाध्याय का निधन, शराब बंदी को लेकर कही थी बहुत बड़ी बात

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पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे किडनी की समस्या से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने चेन्नई में अंतिम सांस ली।

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बतौर जज उनकी नियुक्ति पटना हाई कोर्ट में 22 मई 2017 को हुई। वे 3 दिसंबर 2024 को रिटायर होने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही उनके निधन से संपूर्ण न्याय जगत शोक में डूब गया है।

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चेन्नई के निजी अस्पताल में भर्ती जस्टिस उपाध्याय बीते कुछ दिनों से बीमार थे। जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय का जन्म 4 दिसंबर, 1962 को हुआ था। उनके पिता स्व. विद्याधर उपाध्याय पटना उच्च न्यायालय के सेक्शन ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे और 31 अगस्त, 1982 को सेवानिवृत्त हुए थे।

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जस्टिस उपाध्याय ने एलएलबी, एलएलएम की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की थी। जस्टिस उपाध्याय ने शिक्षण कार्य भी किया है। उन्होंने 22 अगस्त, 1988 से 2010 तक कॉलेज ऑफ कॉमर्स में कानून के अंशकालिक व्याख्याता के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने 1989 से 1996 और 2004 से 2006 तक पटना लॉ कॉलेज में अंशकालिक व्याख्याता के रूप में काम किया।

साथ ही चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में 2007 से मई 2017 तक विजिटिंग फैकल्टी के रूप में भी जस्टिस उपाध्याय ने काम किया था। इस बीच उन्होंने दिसंबर 2010 से मई 2017 तक पटना उच्च न्यायालय, पटना के स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में काम किया।

अनिल उपाध्याय ने 22 मई, 2017 को पटना हाई कोर्ट के जज के रूप कार्यभार ग्रहण किया। उनकी प्रतिभा, विद्वता और कार्य करने की क्षमता बहुत थी। इसी बीच उन्हें किडनी की बीमारी का पता चला। उनके किडनी का प्रत्यारोपण भी हुआ था।

अनिल कुमार उपाध्याय का जन्म 04 दिसम्बर, 1962 को हुआ था। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी और एलएलएम की डिग्री हासिल की। उपाध्याय ने पटना के कामर्स कालेज में अंशकालिक शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य भी किया। उन्होंने पटना लॉ कॉलेज में भी अंशकालिक शिक्षक के रूप में कार्य किया। चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में 2007 से 2017 कार्यरत रहे। राज्य सरकार कर स्टैंडिंग कॉउन्सिल के पद पर 2010 से 2017 तक रहे।

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न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय ने 2020 में शराब पीने के मामले में बंद लोगों की जमानत मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि शराबबंदी कानून का दुरुपयोग हो रहा है। गांधी जी की तरह बदलाव लाना अच्छी बात है लेकिन सजा इतनी बड़ी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने शराबबंदी और शिक्षक नियोजन से संबंधित कई मामलों में विद्वता से कई फैसले सुनाए थे।

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इधर, दरभंगा में खबर से आहत वकिलों ने बुधवार को बार एसोसिएशन भवन में शोक सभा आयोजित किया ।इनका निधन बुधवार की सुबह चेन्नई स्थित अस्पताल में चिकित्सा के दौरान हो गई।

इनके निधन की सूचना मिलते हीं दरभंगा के वकीलों में शोक की लहर छा गई तथा वकालतखाना भवन में वरीय अधिवक्ता कैलाशचन्द्र लाभ और प्रमोद ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित शोकसभा में वकिलों ने शोक व्यक्त किया और स्वर्गीय उपाध्याय के फोटो पर श्रद्धासुमन निवेदित किया।

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शोकाकुल वकील राजीव रंजन ठाकुर, चन्द्रधर मल्लिक, अरुण कुमार चौधरी, पूर्व एपीपी अनिल कुमार सिंह, रतन कुमार झा, सोहन कुमार सिन्हा, रमणजी चौधरी, शशिकांत झा, मनोज कुमार झा उर्फ पप्पू, अनिल मिश्रा, विजय नारायण चौधरी, राम सुखित चौधरी, कविता सिन्हा, संतोष कुमार सिन्हा,अनीता आनंद, रामशंकर चौधरी,अजय कुमार मिश्र,मुरारी लाल केवट, अनिल कुमार मिश्रा, रामवृक्ष सहनी, शिवशंकर झा, माया शंकर चौधरी समेत सैकड़ों वकीलों ने न्यायप्रिय न्यायमूर्ति के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धा निवेदित किया।

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