टीईटी शिक्षक संघ की ओर से नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए पटना हाई कोर्ट में याचिका के खिलाफ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दायर कर दी है।
प्रदेश के लगभग 4.50 लाख नियोजित शिक्षकों की लंबे समय से मांग रही है कि उन्हें सरकार बिना शर्त राज्य कर्मी का दर्जा दे। इसी बीच शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।
इस संबंध में संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम ने कहा कि एक ओर सरकार की ओर से नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाने की खबरें आ रही है। वहीं दूसरी ओर विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से राज्यकर्मी का दर्जा देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दिया गया है। यह समझ से परे है।
इसके पीछे सरकार की या के के पाठक की क्या मंशा है यह समझना मुश्किल है। आखिर ऐसी क्या स्थिति बनी जिस वजह से केके पाठक ने संघ की ओर से दया याचिका के खिलाफ
सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दिया है। यह हम समझ नहीं पा रहे हैं। इस संबंध में हम उच्चतम न्यायालय में अपने वकीलों से बात करेंगे और तभी हम आगे क्या करना है इस संबंध में कुछ बता पाएंगे।
जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से लगातार नियोजित शिक्षकों को आश्वासन दिया जा रहा है कि उन्हें राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाएगा लेकिन, इसके खिलाफ ही शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का सुप्रीम कोर्ट जाना, शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का सबब बन
गया हैञ दरअसल टीईटी शिक्षक संघ की ओर से नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने के लिए पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर किया गया था। इसी याचिका के खिलाफ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दायर की है।







