Kosi River Fair: जीवनदायिनी कोसी की लहरों में जब आस्था हिलोरें लेती है, तब धरती पर एक अद्भुत उत्सव का जन्म होता है। बिहार के सुपौल जिले में कोसी स्पर 19 पर आयोजित यह मेला इसी आस्था और परंपरा का जीवंत प्रमाण है।
Kosi River Fair: सुपौल के कोसी स्पर 19 पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मां कौशिकी की पूजा को पहुंचे हजारों श्रद्धालु
जीवनदायिनी कोसी की गोद में बसा सुपौल जिला एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंगों से सराबोर हो गया है। कोसी स्पर 19 पर मां कौशिकी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके साथ ही यहां एक विशाल मेले का आयोजन भी किया गया है। यह आयोजन सुपौल और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंच रहे हैं। कोसी नदी के तट पर यह विशेष पर्व न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रखता है।
Kosi River Fair: सुपौल में आस्था का केंद्र बना कोसी स्पर 19
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने कोसी नदी में पवित्र स्नान किया। स्नान के पश्चात, उन्होंने श्रद्धापूर्वक मां कौशिकी की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि कोसी नदी में स्नान करने और मां कौशिकी की आराधना करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला अनवरत जारी है। भक्तगण अपने परिवार के साथ पहुंचकर देवी मां का आशीर्वाद ले रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक है।
मेले में बच्चों के लिए झूले, मिठाइयों की दुकानें और विभिन्न प्रकार के खेल-तमाशे भी मौजूद हैं, जो इसे एक पूर्ण पारिवारिक अनुभव बनाते हैं। स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें भी मेले का आकर्षण बढ़ा रही हैं। यह मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करता है, जिससे छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं को आजीविका कमाने का अवसर मिलता है।
मां कौशिकी की महिमा और लोक आस्था
मां कौशिकी की महिमा अपरंपार है और इस क्षेत्र में उनकी पूजा-अर्चना का एक लंबा इतिहास रहा है। सुपौल जिले में यह देवी स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र हैं। श्रद्धालु विभिन्न प्रकार की मन्नतें लेकर आते हैं और पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं। विशेषकर महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए देवी मां की आराधना करती हैं। इस मेले में आकर लोगों को न सिर्फ धार्मिक संतुष्टि मिलती है, बल्कि वे एक-दूसरे से जुड़ते भी हैं और अपनी संस्कृति का जश्न मनाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है ताकि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और स्वच्छता के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यह Kosi River Fair सुपौल की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को बनाए हुए है। यह आयोजन सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का एक महाकुंभ है, जो हर साल नए उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






