
लखीसराय बाईपास पुल में दरार: बिहार में पुलों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद अब लखीसराय बाईपास के आरओबी पुल में दरारें मिलने से हड़कंप मच गया है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।
विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद बिहार में पुलों की जांच तेज हो गई है। इसी कड़ी में लखीसराय शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले बाईपास आरओबी पुल में कई जगहों पर दरारें पाई गईं। इसकी सूचना मिलते ही पथ निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में विभाग के आला अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। बिहार के पथ निर्माण विभाग की ओर से पुल के तकनीकी निरीक्षण के बाद सुरक्षा के मद्देनजर ब्रिज पर भारी वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। आज से ट्रक, ट्रेलर, बस और हाइवा जैसे भारी वाहनों के आवागमन पर अगले आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया गया है।
लखीसराय बाईपास पुल में दरार: हड़कंप और तुरंत कार्रवाई
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और पटना से आई एक विशेष टीम ने बाईपास पुल का गहन निरीक्षण किया। प्रशासन का कहना है कि अगर समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। अब पुल पर भारी वाहनों की एंट्री रोकने के लिए जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। साथ ही वैकल्पिक मार्ग से भारी वाहनों को निकालने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिससे यातायात व्यवस्था में कुछ बदलाव आएंगे।
विक्रमशिला हादसे का असर और पुल का महत्व
भागलपुर में गंगा नदी पर स्थित विक्रमशिला सेतु के एक पिलर के ध्वस्त होने के बाद से ही राज्य में पुलों की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है। विक्रमशिला पुल के गिरने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का संपर्क टूट गया था। लखीसराय बाईपास पुल पटना, बेगूसराय, मुंगेर, देवघर और भागलपुर को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में इस पुल पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध से ट्रांसपोर्ट कारोबार और भारी वाहन चालकों की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, प्रशासन इसे लोगों की सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम बता रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अब लखीसराय बाईपास पुल में दरार की खबर के बाद मरम्मत कार्य पर तेजी से काम होगा ताकि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो सके और यह पुल एक बार फिर पूरी क्षमता से आवागमन के लिए खुल सके।
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