

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: सियासी रणभूमि में अब एक नई फसल उग आई है, जो भविष्य के व्यापारिक रिश्तों पर सवाल उठा रही है। जब बड़े आर्थिक फैसले लिए जाते हैं, तो उसका सीधा असर खेत-खलिहान पर पड़ता है।
राहुल गांधी ने किसानों से की मुलाकात, ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौता’ पर गरमाई सियासत
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों की चिंताएं और भाजपा का पलटवार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय कार्यालय में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उनकी चिंताओं को ध्यान से सुना। इस मुलाकात ने तत्काल ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। भारतीय जनता पार्टी ने इसे ‘सुनियोजित’ बताते हुए राहुल गांधी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश भर के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इन संघों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि यह व्यापार समझौता लागू होता है, तो भारतीय किसानों, विशेषकर मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे की खेती करने वालों पर इसका गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। किसान प्रतिनिधियों ने इस समझौते के खिलाफ एक देशव्यापी आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया, उनका तर्क है कि इससे किसानों की आय पर बुरा असर पड़ेगा और कृषि क्षेत्र के लिए निर्धारित सुरक्षा उपाय कमजोर पड़ जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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भाजपा का पलटवार: ‘सुनियोजित राजनीति’ का आरोप
भारतीय जनता पार्टी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी की इस मुलाकात की एक तस्वीर साझा की, जिसमें हरियाणा और पंजाब के कांग्रेस नेताओं सहित कई अन्य सहयोगी भी मौजूद दिखाई दिए। भाजपा ने अपने पोस्ट में कहा, “राहुल गांधी का एक और झूठ, देश के सामने बेनकाब। जिसे किसानों के साथ बैठक बताया जा रहा था, वह वास्तव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सभा थी।” पार्टी ने आगे आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने देश की लगभग हर संस्था और समुदाय का राजनीतिकरण किया है, उनका अपमान किया है, और अब वे किसानों को भी राजनीतिक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा का स्पष्ट कहना था कि सुनियोजित राजनीति कभी वास्तविक और ईमानदार नेतृत्व का स्थान नहीं ले सकती। देश को आज पारदर्शिता और सच्चाई की आवश्यकता है, न कि कांग्रेस के मनगढ़ंत बयानों और राजनीतिक हथकंडों की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए नई नीतियों पर विचार किया जा रहा है।


