
बिहार के सरकारी स्कूलों में अब नो बैग (No Bag Day) योजना का शुभारंभ हो गया है। इसके तहत अब हफ्ते में पांच ही दिन पढ़ाई होगी। सोमवार से शुक्रवार तक बच्चों को बैग लेकर जाना होगा। वहीं शनिवार को बच्चे बिना किताबों के आएंगे। मतलब यह कि सप्ताह में अब एक दिन नो बैग डे (No Bag Day) होगा।
यह बात सीएम नीतीश कुमार ने कही। शुक्रवार को पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित शिक्षा दिवस 2022 समारोह को संबोधित करते सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने एक एप भी लांच किया।
इसके साथ ही पुस्तक का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्कूलों में शनिवार को नो बैग योजना का शुभारंभ करते हुए स्वच्छ विद्यालय पोर्टल का भी शुभारंभ किया। कहा कि सबसे पहले बिहार से मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई. 2008 से पूरे देश में आज की तारीख को शिक्षा दिवस के रूप में मनाई जाती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सबसे पहले बिहार से मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। इसके बाद हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया। तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह ने बात मानी और 2008 से देश भर में मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिवस पर शिक्षा दिवस मनाया जाने लगा।
क्या है यह योजना
सरकार छात्रों पर बोझ कम करने के लिए स्कूलों में ‘ नो बैग डे ‘ नियम लाई है। सरकार हफ्ते में कम से कम एक दिन को नो बैग डे बनाएगी। शिक्षा विभाग ने कहा, ‘इस आशय की अधिसूचना जल्द ही जारी की गई है। साप्ताहिक ‘नो-बैग डे’ में कार्य आधारित व्यावहारिक कक्षाएं होंगी।
सप्ताह में कम से कम एक बार, छात्र केवल लंच बॉक्स लेकर ही स्कूलों में आएंगे। उन्हें किताबें ले जाने की जरूरत नहीं है। वो दिन व्यावहारिक और अनुभवात्मक चीजों को सीखने के लिए समर्पित होगा।’ इस तरह की नीति का उद्देश्य छात्रों को विभिन्न गतिविधियों में शामिल करना है, जो उनके सीखने पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।






