बड़े-बड़े सूरमाओं के पसीने छुड़ाने वाले शराबबंदी कानून की धज्जियां कैसे उड़ रही हैं, इसकी बानगी बिहार के सुपौल से आई है। सूबे में शराबबंदी को कड़ाई से लागू कराने गई उत्पाद विभाग की टीम पर तस्करों ने जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें महिला एएसआई गंभीर रूप से घायल हो गईं।
Supaul News: महिला ASI पर जानलेवा हमला, सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें
Supaul News: यह घटना बुधवार शाम सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत श्रीपुर पंचायत में हुई, जहां शराब तस्करों और उनके समर्थकों ने पुलिस बल पर न केवल पथराव किया, बल्कि सरकारी वाहनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि श्रीपुर पंचायत के वार्ड नंबर 11 निवासी जोगिंदर सरदार के घर से बड़े पैमाने पर शराब की तस्करी की जा रही है। इस सूचना के सत्यापन के लिए तीन पदाधिकारियों और नौ कांस्टेबलों की एक टीम शाम लगभग साढ़े सात बजे मौके पर पहुंची। टीम ने जैसे ही घेराबंदी शुरू की, पहले से जेल जा चुके तस्कर जोगिंदर सरदार के परिजनों और समर्थकों ने टीम को चारों तरफ से घेर लिया।
देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और लाठी-डंडों व ईंट-पत्थरों से टीम पर हमला बोल दिया। इसी आपाधापी के बीच हमलावरों ने टीम का नेतृत्व कर रही महिला एएसआई अंजलि कुमारी को निशाना बनाया, जिससे उनके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। स्थिति को बेकाबू होते देख उत्पाद निरीक्षक संजय सिंह ने सूझबूझ का परिचय दिया और घायल महिला अधिकारी को भीड़ के चंगुल से निकालकर तुरंत इलाज के लिए सिमराही अस्पताल रवाना किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हमले की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। घटना के कुछ ही घंटों के भीतर वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस ने श्रीपुर पंचायत में धावा बोला। पुलिस की इस भारी दबिश के बाद हमलावर तस्करों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल से सात चिन्हित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे फिलहाल गहन पूछताछ जारी है।
यह घटना एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून को लागू करने में पुलिस को आ रही चुनौतियों को उजागर करती है। शराब माफिया के बढ़ते दुस्साहस और उनके स्थानीय नेटवर्क ने पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी हुए हैं पुलिस पर ऐसे हमले
गौरतलब है कि राघोपुर प्रखंड में पुलिस पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले तेकुना पंचायत के झंगराही टोला में भी छापेमारी के दौरान ग्रामीणों ने तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित कई पुलिसकर्मियों को जख्मी कर दिया था। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि शराब माफिया ने स्थानीय स्तर पर अपनी जड़ें कितनी गहरी जमा ली हैं और कानून तोड़ने वालों के हौसले कितने बुलंद हो चले हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए केवल छापेमारी ही काफी नहीं है, बल्कि एक मजबूत खुफिया तंत्र और स्थानीय समुदाय का सहयोग भी बेहद जरूरी है। पुलिस को ऐसे तत्वों के खिलाफ और अधिक सख्त कार्रवाई करनी होगी जो कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

