
Super El Nino: प्रशांत महासागर से आ रही एक भयावह खबर ने पूरी दुनिया के मौसम वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी विज्ञान संस्था NOAA की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2026 में एक ‘सुपर एल नीनो’ अपने चरम पर होगा, जो भारत समेत वैश्विक मौसम तंत्र को हिलाकर रख सकता है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों के लिए तो यह किसी बुरे सपने जैसा है, जहां सामान्य से बेहद कम बारिश और गंभीर सूखे की आशंका जताई गई है।
Super El Nino का खतरा: समुद्र की गर्मी और बिगड़ता मानसून
प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर पहुंच गया है। आमतौर पर यह गर्म पानी ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की ओर रहता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी हवाएं मजबूत होती हैं। लेकिन इस बार, वैज्ञानिकों ने इस गर्म पानी के विशाल क्षेत्र को दक्षिण अमेरिका के तटों की ओर खिसकते हुए पाया है। यह भौगोलिक बदलाव मानसूनी हवाओं के दबाव क्षेत्र को कमजोर कर रहा है, जिससे भारत तक पहुंचने वाले बारिश के बादल बिखर सकते हैं और देश में मानसून की कमी हो सकती है।
बिहार पर गहराता संकट: अगस्त-सितंबर में सूखे की आशंका
मौसम विभाग के शुरुआती आकलन से पता चलता है कि जून में मानसून की शुरुआत भले ही सामान्य दिखे, लेकिन असली चुनौती अगस्त और सितंबर के महीनों में सामने आएगी। इन दो महीनों के दौरान बिहार के अधिकांश जिलों में बारिश की रफ्तार थम सकती है। धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों को इसी समय सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में बारिश न होने से खेत सूख सकते हैं और खड़ी फसलें बर्बाद हो सकती हैं। बिहार की लगभग अस्सी फीसदी ग्रामीण आबादी खेती और उससे जुड़े रोजगार पर निर्भर है। मानसून की विफलता का सबसे सीधा और गंभीर आर्थिक नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा। अनाज का उत्पादन घटने से आने वाले महीनों में स्थानीय बाजारों में चावल, दाल और खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ जाएगा। ग्रामीण इलाकों में कृषि मजदूरी में कमी से पलायन की समस्या भी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
रिकॉर्ड तोड़ तापमान और पानी की किल्लत
इस Super El Nino का असर केवल बारिश की कमी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के मैदानी भागों में दैनिक तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा सकता है। आने वाले महीनों में लू (हीटवेव) के दिनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मरीजों की तादाद अचानक बढ़ने की आशंका है। लगातार बारिश न होने से नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरेगा और राज्य के भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज होने का अनुमान है। जिन इलाकों में पीने के पानी के लिए चापाकल और बोरिंग पर निर्भरता है, वहां गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। भीषण गर्मी के कारण कूलर, पंखे और एसी का इस्तेमाल अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाएगा, जिससे बिजली ग्रिड पर भारी दबाव आएगा और लंबी बिजली कटौती की स्थिति पैदा हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इतिहास के पन्नों को देखें तो 1877-78 में भी दुनिया ने ऐसा ही एक भीषण Super El Nino देखा था, जिसके कारण भारतीय उपमहाद्वीप में भयावह सूखा पड़ा था। हालांकि, आज भारत के पास आधुनिक मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां और बेहतर प्रशासनिक तंत्र है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद, इस Super El Nino से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जल संरक्षण और वैकल्पिक सिंचाई पद्धतियों को तुरंत लागू करना बेहद जरूरी है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






