
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने सीधे तौर पर आज यह कह दिया कि स्कूल जाकर बच्चों को नहीं पढ़ाने वाले शिक्षकों को नहीं बख्शेंगे। उन्हें निकाल दिया जाएगा।
उन्होंने बिहार के शिक्षकों को चेताते हुए कहा कि हमने मंत्री और सचिव से कह दिया है कि जो स्कूल में नहीं पढ़ाते हैं उनको निकाल दीजिए, कोई जरूरत नहीं है। अगर वह पढ़ायेंगे तो और ज्यादा दीजिए पैसा, ताकि कोई दिक्कत ना हो।
पहले शिक्षकों की कितनी बहाली थी अब हम लोग कितने लोगों को बहाल कर रहे हैं।हम तो एक पिछड़ा राज्य हैं, यह तो अलग बात है लेकिन हम लोग हर क्षेत्र में मेहनत कर रहे हैं। सरकार का जो भी बजट होता है उसमें सबसे अधिक खर्चा शिक्षा पर होता है। अभी 21 परसेंट है लेकिन हम लोग चाहते हैं कि बजट का 25 परसेंट शिक्षा पर खर्च हो।
सीएम नीतीश कुमार आज पटना के ज्ञान भवन में देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर आयोजित शिक्षा दिवस-2022 समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नीतीश कुमार ने कहा कि जब हम सरकार में आए तो पता चला कि पांचवीं क्लास के आगे कोई जाता ही नहीं है। लड़कियां पढ़ती ही नहीं है। पहले काफी कम संख्या में लड़कियां स्कूल जाती थी। बालिका शिक्षा को बढ़ाने के लिए हमने कई तरह की योजना को लाया।
अब नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में लड़कियां न सिर्फ हाई स्कूल तक बल्कि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं । अब तो लड़का और लड़की बराबर रूप से पढ़ रहे हैं। हमको लगा कि मौलाना साहब ने जो काम कराया था हमको उसी को आगे बढ़ाना है। हम चाहते हैं कि लड़कियां खूब पढ़े। लड़कियां अगर पढ़ लेंगी तो प्रजनन दर घट जाएगा। अभी प्रजनन दर 2.9 पर है, पहले यह 4 से ऊपर था लेकिन जैसे-जैसे लड़कियां शिक्षित हो रहीं, प्रजनन दर में कमी आ रही है।






