
Lok Sabha Speaker: लोकतंत्र के मंदिर में इन दिनों सियासी अखाड़ा गर्म है। जहां एक ओर विपक्ष ‘तानाशाही’ के आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष नियमों और परंपराओं की दुहाई दे रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव की आंच में जलती संसद: लोकसभा स्पीकर के खिलाफ रण, क्या बदलेंगे समीकरण?
लोकसभा स्पीकर पर विपक्ष के आरोपों की फेहरिस्त
Lok Sabha Speaker: बुधवार को संसद में गहमागहमी चरम पर रही, जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में तीखी बहस हुई। मंगलवार को विपक्षी नेताओं ने उप-स्पीकर का पद खाली रहने, माइक्रोफोन बंद करने, विपक्षी सदस्यों को बोलने की अनुमति न देने और सामूहिक निलंबन जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों ने संसदीय कार्यवाही पर सवाल खड़े कर दिए। इसी बीच, राज्यसभा में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा जारी रही। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए भी नोटिस पर आवश्यक हस्ताक्षर पूरे हो गए हैं, जिसे अगले एक-दो दिन में संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करने की तैयारी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के संकल्प प्रस्ताव को ‘अफसोसनाक घटना’ बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाए हैं, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है। शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने कभी भी किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। उन्होंने पिछली तीन घटनाओं का जिक्र किया, जब कांग्रेस सत्ता में थी और ऐसे प्रस्ताव लाए गए थे। शाह ने ओम बिरला की नैतिक उच्चता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नामित होने के बाद से ही अपनी कुर्सी पर बैठना छोड़ दिया है, जिससे संसदीय कार्यवाही की शुचिता बनी रहे।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर ने इस बहस के दौरान कांग्रेस नेता पर निशाना साधा। उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता पर सदन के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “फोमो (फियर ऑफ मिसिंग आउट) गांधी को सुर्खियों से हट जाने का डर लगता है।”
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अध्यक्ष ओम बिरला के ‘हाथ बांध’ दिए हैं, जिससे वे सत्ता पक्ष की इच्छा के अनुसार काम करने के लिए मजबूर हैं।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस अवसर पर देश में रसोई गैस (एलपीजी) की कथित किल्लत को मोदी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। उन्होंने सवाल किया कि जनता आखिर कितना बर्दाश्त करेगी, जब हर चीज के दाम बढ़ गए हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी दावा किया कि उन्हें सदन में कई बार बोलने से रोका गया है। उन्होंने इसे देश के इतिहास में पहली बार बताया कि विपक्ष के नेता को सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए रविशंकर प्रसाद ने संसदीय प्रणाली पर ‘कॉल एंड शकधर’ की एक पुस्तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रहित के मुद्दों पर बोलते समय शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए और विदेशी धरती पर दलीय राजनीति से बचना चाहिए।
राज्यसभा में ग्रामीण विकास और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को ‘धोखाधड़ी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को विभिन्न राज्यों में चुनाव जीतने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। खरगे ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया सभी चुनावी राज्यों में चल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण विकास को बताते हुए, भाजपा ने राज्यसभा में कहा कि 2026-27 के बजट में ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। भाजपा सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार ने सूरत और कुरनूल के बीच एक नया ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे बनाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना से दिल्ली और चेन्नई के बीच की दूरी लगभग 320 किलोमीटर कम हो जाएगी। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में गडकरी ने यह भी कहा कि इस राजमार्ग के निर्माण के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा का समय घटकर 12 घंटे से भी कम हो जाएगा।
भाजपा के बाबू राम निषाद ने राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे में हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य सरकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और राज्य इसकी पुनरावृत्ति न करे। यह मुद्दा देशज टाइम्स बिहार का N0.1 लगातार उठाता रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष: भारतीय संसद की मर्यादा और परंपराओं पर जब सवालिया निशान लगता है, तो यह सिर्फ एक कुर्सी पर नहीं, बल्कि समूचे लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार होता है। हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने इसी बहस को फिर हवा दी है, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखी है।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: एक दुर्भाग्यपूर्ण परंपरा
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस में हिस्सा लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अध्यक्ष किसी दल विशेष के नहीं, बल्कि पूरे सदन के संरक्षक होते हैं। शाह ने इस घटना को “असाधारण” करार देते हुए चिंता व्यक्त की कि लगभग चार दशकों के बाद पहली बार किसी लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध ऐसा प्रस्ताव लाया गया है। उन्होंने इसे संसदीय राजनीति और सदन के लिए एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ क्षण बताया। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि संसद की कार्यवाही हमेशा आपसी विश्वास के मजबूत आधार पर चलती आई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष का पद एक निष्पक्ष संरक्षक का होता है, जो सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने याद दिलाया कि सत्रों के संचालन के लिए विशेष नियम इसी लोकसभा द्वारा बनाए गए हैं। शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि यह सदन कोई सामान्य ‘बाजार’ नहीं है, बल्कि एक गरिमामय संस्था है, जहां सदस्यों से नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी बात रखने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने सदन को यह भी याद दिलाया कि वर्तमान अध्यक्ष ओम बिरला की नियुक्ति के समय सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन पर प्रतिष्ठित किया था। उनकी नियुक्ति ने एक स्वस्थ संसदीय परंपरा को जन्म दिया था, जो हमारे लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाती है।
अमित शाह ने कहा कि इसका सीधा अर्थ यह है कि अध्यक्ष को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों का खुला समर्थन और स्वतंत्र माहौल मिलना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि अध्यक्ष के किसी निर्णय से असहमति हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अध्यक्ष के निर्णय अंतिम माने जाते हैं। इसके बावजूद, विपक्ष ने सीधे तौर पर अध्यक्ष की निष्ठा पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जो बेहद गंभीर मामला है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गहरा आघात
गृह मंत्री ने भावुक होकर कहा कि यह लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ‘पंचायत’ है। सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतंत्र ने अपनी एक विशिष्ट साख और गरिमा बनाई है, जिसकी प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाता है। लेकिन जब इस ‘पंचायत’ के मुखिया, यानी अध्यक्ष की निष्ठा पर ही सवाल उठाए जाते हैं, तो इसका असर केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है। उन्होंने अफसोस जताया कि ऐसी स्थिति में अध्यक्ष पर शंका के बादल खड़े कर दिए गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि पिछले 75 वर्षों से देश की दोनों सदनों ने मिलकर भारतीय लोकतंत्र की नींव को और भी गहरा और मजबूत किया है। लेकिन, विपक्ष के इस कदम ने इस गौरवशाली साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उन्होंने दोहराया कि सदन का संचालन आपसी विश्वास से होता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए अध्यक्ष सदन के ‘कस्टोडियन’ होते हैं। यही कारण है कि विशेष नियम बनाए गए हैं। गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सदन कोई ‘मेला’ नहीं है; यहां सभी को नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। सदन के नियमों के विरुद्ध बोलने का अधिकार किसी को भी नहीं है, चाहे वह कोई भी सदस्य क्यों न हो। उन्होंने विपक्ष द्वारा अध्यक्ष के निर्णयों की निष्ठा पर सवाल उठाने को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय’ बताया। शाह ने अंत में कहा कि यह घटना हमारी उच्च संसदीय परंपराओं के निर्वहन के लिए एक अत्यंत अफसोसजनक और दुखद अध्याय है।


