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Brain-dead Woman Recovery: पिलिभीत में चमत्कार! गड्ढे में गिरी एम्बुलेंस, फिर ‘ब्रेन-डेड महिला की रिकवरी’ ने सबको चौंकाया!

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Brain-dead woman recovery: मौत के मुहाने से लौट आई जिंदगी, जब सड़क के एक गड्ढे ने लिखी वापसी की कहानी। जिसे डॉक्टरों ने ब्रेन-डेड घोषित कर घर भेज दिया था, एक झटके ने उसे फिर से जीवनदान दे दिया।

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पिलिभीत, उत्तर प्रदेश: जिंदगी और मौत के बीच झूल रही एक 50 वर्षीय महिला को डॉक्टरों ने ब्रेन-डेड घोषित कर घर भेज दिया था। उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी कि तभी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एम्बुलेंस के एक गड्ढे में गिरने से हुए झटके ने उसमें जीवन के लक्षण जगा दिए। यह घटना हाफिजगंज के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के बरेली-हरिद्वार खंड पर हुई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शुरुआत में इसे एक अविश्वसनीय चिकित्सीय चमत्कार माना गया, जिसने स्थानीय लोगों के बीच सड़क की खस्ता हालत और इस अद्भुत घटना दोनों को लेकर चर्चा छेड़ दी। लगभग 12 दिनों के गहन उपचार के बाद, महिला पूरी तरह से ठीक हो गई।

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अस्पताल से घर लौटते समय कैसे हुई ब्रेन-डेड महिला की रिकवरी?

हालांकि, डॉक्टरों ने बाद में इस सुधार के पीछे एक भिन्न संभावना व्यक्त की। डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, यह सुधार संभवतः किसी जहरीले कीड़े या सांप के काटने के इलाज के कारण हुआ, न कि केवल टक्कर से। उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को महिला घर पर अचानक बेहोश हो गईं थीं और उनके हाथ-पैर सुन्न पड़ गए थे। उन्हें पीलीभीत स्थित मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर हालत को देखते हुए बरेली रेफर कर दिया गया। दो दिनों के इलाज के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें छुट्टी दे दी गई और घर वापस लाया गया। परिवार ने दाह संस्कार की भी तैयारियां कर ली थीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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डॉ. सिंह ने आगे बताया कि रास्ते में मरीज के परिजनों ने शायद उनकी धीमी सांसों को महसूस किया, जिसके बाद वे उन्हें उनके पास ले आए। हमने तत्काल पूरी आईसीयू टीम को सक्रिय किया और उन्हें भर्ती किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार सांप के काटने से न्यूरोटॉक्सिन निकलते हैं, जिससे व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है, उसके हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं और पुतलियां भी फैल जाती हैं। इसी आधार पर उन्होंने सांप के जहर के असर को कम करने वाली दवा से इलाज शुरू किया। इलाज शुरू होने के 24 घंटे के भीतर कुछ हलचल महसूस हुई। एक हफ्ते बाद मरीज धीरे-धीरे होश में आने लगीं, सांस की नली हटा दी गई और अब वह खुद चल सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब मरीज पूरी तरह से ठीक हैं।

डॉक्टरों की नई थ्योरी: क्या था असली कारण?

महिला के पति कुलदीप शुक्ला ने बताया कि 22 फरवरी को उनकी पत्नी ने रक्तचाप की समस्या बताई और दवा लेने के 15 मिनट बाद ही वह बेहोश हो गईं। वे उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ से उन्हें दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया। 23 तारीख की शाम को डॉक्टरों ने उन्हें घर ले जाने के लिए कह दिया, यह बताते हुए कि उनमें कोई जान नहीं बची है; उनकी सांसें रुक रही थीं, नब्ज धीमी पड़ रही थी और रक्तचाप भी गिर रहा था। 24 तारीख को जब उन्हें घर वापस लाया जा रहा था, तब हाफिजगंज के पास गाड़ी एक गड्ढे में जा गिरी और उस झटके के बाद उनकी पत्नी ने सांसें लेना शुरू कर दिया। वे तुरंत डॉ. राकेश सिंह के पास ले गए, और आज 10 दिन बाद उनकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ हैं।

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