
Election Commission: लोकतंत्र के निष्पक्ष प्रहरी पर जब पक्षपात का साया मंडराने लगे, तो सवाल उठना लाज़मी है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भारतीय चुनाव आयोग पर भाजपा के प्रति अत्यधिक पक्षपातपूर्ण होने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके बाद चुनावी निष्पक्षता पर एक नई बहस छिड़ गई है।
Election Commission: कांग्रेस का आरोप- भाजपा के इशारे पर काम कर रहा चुनाव आयोग, निष्पक्षता पर सवाल
चुनाव आयोग पर क्यों उठ रहे सवाल?
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सोमवार को भारतीय चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला और उसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति अत्यधिक पक्षपातपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल में विकास परियोजनाओं की घोषणा के ठीक अगले दिन ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया। भगत ने कहा, “भारतीय चुनाव आयोग बेहद पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करते हैं और ठीक अगले दिन राज्य चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी जाती है; यह सरासर धांधली है।”
उन्होंने केंद्र सरकार पर सुनियोजित तरीके से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ की बात करती है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में चारों राज्यों के लिए मतदान की तारीखें और परिणाम घोषित होने का दिन एक दूसरे से बहुत दूर रखा गया है। भगत ने सवाल उठाया, “सरकार एक राष्ट्र एक चुनाव की बात करती है, लेकिन चारों राज्यों में मतदान और परिणाम घोषित होने की तारीखों में बहुत लंबा अंतराल रखा गया है। तो क्या आपको नहीं लगता कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जितना अधिक विलंब होगा, उतना ही परिणाम भाजपा के पक्ष में जाएगा। आप पिछले रिकॉर्ड देख सकते हैं। इन सब कारणों से लोग उन पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।”
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चुनावों के समय पर विपक्ष का संदेह
चुनाव आयोग के हालिया फैसलों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, खासकर चुनावों की घोषणा के समय को लेकर। आरोप है कि महत्वपूर्ण घोषणाओं के बाद ही चुनावी तिथियां घोषित की जाती हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल को लाभ मिल सके।
ये टिप्पणियां रविवार को चुनाव आयोग द्वारा चार राज्यों – पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम – तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आई हैं। कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। केरल और असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा। पुडुचेरी में भी मतदान 9 अप्रैल को ही होगा। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि चारों राज्यों और पुडुचेरी में वोटों की गिनती 4 मई को होगी। वर्तमान विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग तिथियों पर समाप्त हो रहा है: पश्चिम बंगाल में 7 मई, तमिलनाडु में 10 मई, असम में 20 मई, केरल में 23 मई और पुडुचेरी में 15 जून। यह जानकारी आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन तिथियों के अंतराल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि एक राष्ट्र, एक चुनाव की बात करने वाली सरकार के बावजूद मतदान और मतगणना के दिनों में लंबा अंतर देखा जा रहा है।




