
Delhi Weather: मार्च की तपिश में जहां धरती अंगार उगलती है, वहीं दिल्ली के आसमान से बरसती बूंदें किसी अचरज से कम नहीं। अगर बीते रविवार को आप दिल्ली में चिलचिलाती धूप की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन बाहर निकलने पर ठंडी हवाओं और बादलों का डेरा मिला, तो आप अकेले नहीं थे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ हल्की बारिश और गरज-चमक का पूर्वानुमान जारी किया था, जिससे तापमान में 3 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
Delhi Weather: मार्च की बेमौसम बारिश से दिल्ली हुई सराबोर, क्या आगे भी मिलेगी गर्मी से राहत?
Delhi Weather: क्यों बदली मार्च में दिल्ली की चाल?
IMD ने सुबह और दोपहर के समय हल्की बारिश का अनुमान जताया था, और सतह पर हवा की गति 50 kmph तक पहुँचने की संभावना जताई गई थी। इस बारिश और ठंडक ने सामान्य से काफी अधिक चल रहे तापमान में 3 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी लाकर लोगों को बड़ी राहत दी है।
दरअसल, इस अप्रत्याशित मौसम बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ का हाथ है। ये भूमध्य सागर के ऊपर बनने वाले कम दबाव वाले सिस्टम होते हैं जो ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचते हैं। आमतौर पर ये सर्दियों में उत्तरी पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी लाते हैं, लेकिन इस बार मार्च में एक के बाद एक इनके आने से नमी सामान्य से कहीं ज़्यादा मैदानी इलाकों तक पहुँच गई। ‘मौसम तक’ के संस्थापक और मौसम व्लॉगर देवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 15 मार्च को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है, और इसका असर मैदानी इलाकों तक भी फैल सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
त्रिपाठी ने आगे कहा कि तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, और इसमें कुछ और कमी आने की भी संभावना है। मध्य प्रदेश, गुजरात, दक्षिण राजस्थान और महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है।
कब तक रहेगा यह सुहाना मौसम?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि 17 मार्च की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे ठंडक का यह सिलसिला और आगे बढ़ सकता है। स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया का मानना है कि हवा के बहाव में बदलाव (wind discontinuity) के कारण मार्च के मध्य से अप्रैल तक दक्षिण और पूर्वी भारत में मॉनसून से पहले की बारिश भी हो सकती है।
दहिया के अनुसार, भारत कम से कम 15 से 20 अप्रैल तक भीषण लू (heatwave) से बचा रह सकता है; यह एक बड़ी राहत होगी, खासकर यह देखते हुए कि इस साल तापमान में बढ़ोतरी काफी पहले ही शुरू हो गई थी।
देश के किन हिस्सों में होगी बारिश?
IMD ने काफी बड़े इलाके में बारिश की संभावना जताई है। असम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश हो सकती है। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए 15 से 19 मार्च के बीच आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इन राज्यों में कुछ जगहों पर ओले गिरने की भी आशंका है।
त्रिपाठी ने यह भी बताया कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होगी। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय शामिल हैं, में भारी बारिश का अनुमान है।
किसानों के लिए क्या यह अच्छी खबर है?
पूरी तरह से नहीं। हालांकि तापमान में गिरावट से गेहूं, चना और सरसों जैसी खड़ी रबी फसलों पर नमी का दबाव कम होता है, लेकिन IMD ने कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। मॉनसून से पहले होने वाली बारिश, जिसके साथ ओले और तेज़ हवाएं (जिनकी गति 50 से 60 kmph और कुछ इलाकों में 70 kmph तक हो सकती है) चल सकती हैं, बागवानी और खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह लोगों और मवेशियों को भी घायल कर सकती है, और बिजली व संचार लाइनों को हल्का या गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बागों और सब्जियों के खेतों में ओलों से बचाने वाले जाल (हैल नेट) का इस्तेमाल करें, और अपने मवेशियों को घर के अंदर ही रखें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




