North Bengal Earthquake News: रविवार रात भूटान में आए शक्तिशाली भूकंप ने उत्तरी बंगाल के कई शहरों में भारी दहशत पैदा कर दी। 5.6 तीव्रता के इन झटकों से सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार सहित अन्य कई क्षेत्रों में लोग अचानक अपनी नींद से जाग गए। भूकंप के बाद तुरंत ही बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह घटना रात 11 बजकर 6 मिनट पर हुई, जब अधिकांश लोग सो रहे थे।
भूकंप का केंद्र पड़ोसी देश भूटान में स्थित था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर बताई जा रही है। इसका प्रभाव भारतीय सीमा के अंदर उत्तर बंगाल के विस्तृत क्षेत्र में साफ तौर पर महसूस किया गया। सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे प्रमुख शहरों में धरती हिलने से लोगों के बीच कुछ देर के लिए भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। झटके इतने तेज थे कि लोगों को बिस्तर से उठकर सुरक्षित स्थान पर जाने पर मजबूर होना पड़ा।
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भूकंप के बाद सड़कों पर दिखी लोगों की भीड़ और दहशत
भूकंप के झटके महसूस होते ही सिलीगुड़ी में लोग तुरंत अपने घरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर भीड़ जमा हो गई, हर किसी के चेहरे पर चिंता और डर स्पष्ट दिख रहा था। कई लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकल आए थे। इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी भूकंप को लेकर तेजी से चर्चाएं शुरू हो गईं, जहां लोग अपने अनुभव और आसपास की स्थिति साझा कर रहे थे।
जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही थी। इन इलाकों के निवासियों ने बताया कि कुछ सेकंड के लिए झटके काफी तीव्र थे, जिसके कारण घरों में रखी वस्तुएं हिलने लगी थीं और छत के पंखे झूलते दिखाई दिए थे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सभी इस अप्रत्याशित घटना से भयभीत थे। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की कोई सूचना नहीं दी है, लेकिन लोगों में अभी भी डर का माहौल बना हुआ है।
क्यों यह क्षेत्र है भूकंप के प्रति इतना संवेदनशील?
भूकंपीय दृष्टि से हिमालयी क्षेत्र और इसके आसपास के इलाके काफी संवेदनशील माने जाते हैं। भारत का यह पूर्वोत्तर हिस्सा और इससे सटे भूटान का इलाका भूकंप के उच्च जोखिम वाले ज़ोन में आता है, जिसे सिस्मिक ज़ोन IV और V में वर्गीकृत किया गया है। यहां अक्सर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं, जो भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव का परिणाम होते हैं। ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती रहती हैं, जिससे भूगर्भ में तनाव पैदा होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्लेटों के बीच लगातार तनाव बढ़ने के कारण समय-समय पर ऊर्जा मुक्त होती है, जिसके परिणामस्वरूप भूकंप आते हैं। यही कारण है कि Bhutan Earthquake News अक्सर इस क्षेत्र से जुड़ी रहती है, क्योंकि पड़ोसी देश में उत्पन्न होने वाले भूकंप का सीधा असर उत्तरी बंगाल और पूर्वोत्तर भारत पर पड़ता है। ऐसे में, इस संवेदनशील क्षेत्र के निवासियों को हमेशा भूकंप से बचाव के उपायों के प्रति सतर्क और जागरूक रहने की सलाह दी जाती है।
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भूकंप के झटके महसूस होने के तुरंत बाद कई स्थानीय लोगों ने बिजली कटने की भी शिकायत की, हालांकि यह कुछ समय के लिए ही था। प्रशासन ने लोगों से शांत रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। लोगों को यह भी याद दिलाया गया है कि ऐसे समय में लिफ्ट का उपयोग न करें और खुले स्थान पर चले जाएं।
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रात में आए इन झटकों से भले ही अभी तक कोई बड़ा नुकसान दर्ज न किया गया हो, लेकिन लोगों के मन में डर और अनिश्चितता का भाव गहरा गया है। इस घटना ने एक बार फिर भूकंपरोधी इमारतों के निर्माण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है और सुरक्षा उपायों को लेकर जनता को जागरूक करने के प्रयास लगातार जारी हैं।







