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मार्च, 16, 2026
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पूसा कृषि विज्ञान मेले में मंत्री शिवराज सिंह का बड़ा ऐलान: ‘विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत’ की राह पर कृषि सुधार

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कृषि सुधार: अन्नदाता की थाली में सिर्फ रोटी नहीं, स्वाभिमान भी परोसा जाना चाहिए। इसी संकल्प के साथ अब व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है, जहाँ किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाएगा।

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राष्ट्रीय राजधानी स्थित आईसीएआर-आईएआरआई परिसर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साधने के लिए एक विस्तृत कृषि सुधार एजेंडा प्रस्तुत किया। मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसानों के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी, प्रक्रियात्मक जटिलताएँ और कमजोर निगरानी प्रणाली अब स्वीकार्य नहीं होगी।

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किसानों की हर समस्या पर केंद्रीय मंत्री का कड़ा रुख: कृषि सुधार की दिशा में बड़े कदम

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) में आयोजित यह वार्षिक मेला एक औपचारिक वृक्षारोपण अभियान के साथ शुरू हुआ। इस आयोजन में कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट और आईएआरआई के निदेशक सी.एच. श्रीनिवास राव सहित कई वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंत्री चौहान ने नीति निर्माण में किसानों को प्राथमिकता देने का प्रत्यक्ष उदाहरण पेश किया, जब उन्होंने मंच पर एक दिव्यांग किसान की व्यक्तिगत रूप से सहायता की। यह घटना मंत्रालय के ‘किसान सर्वोपरि’ दृष्टिकोण को मजबूत करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दौरान सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से नवाजा गया।

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लंबित किसान भुगतान के विषय पर मंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि किसानों के बकाया भुगतान में विलंब करने वाली किसी भी एजेंसी या राज्य सरकार को रोकी गई राशि पर 12% ब्याज देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि राज्य स्तर पर ऐसी देरी होती है, तो केंद्र सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में अपनी हिस्सेदारी हस्तांतरित करने के तरीकों पर विचार करेगी। किसानों के धन को रोककर अनुचित लाभ कमाने की यह प्रवृत्ति अब बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगी।

कृषि मशीनीकरण और सब्सिडी योजनाओं पर गहरी निगरानी की आवश्यकता

कृषि मशीनीकरण और सब्सिडी से संबंधित योजनाओं पर बात करते हुए चौहान ने बताया कि 18 से अधिक केंद्रीय योजनाएं राज्यों के सहयोग से लागू की जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी आवश्यक है कि इन योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र किसानों तक ही पहुंचे। मंत्री ने ऐसे कई उदाहरणों का उल्लेख किया जहाँ धनराशि आवंटित होने के बावजूद सूचीबद्ध लाभार्थियों को आवश्यक उपकरण नहीं मिल पाए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ऐसी अनियमितताओं पर अब लगाम कसी जाएगी, यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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