
KK Pathak | Bihar News | केके पाठक पर Muzaffarpur CJM court में ‘केस’ दायर किया गया है। शिक्षकों पर अमर्यादित भाषा, अपशब्दों में बुरे फंसे KK पर चौतरफा हमले हो रहे। कहा जा रहा, अब, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक नहीं मान रहे हैं। इस मसले को लेकर लगातार बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में हंगामा जारी है।
KK Pathak | Bihar News | पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अब जहां केके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं,
वहीं, बिहार विधान परिषद् में नेता विपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अब जहां केके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं, बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ मुजफ्फरपुर जिले के सीजेएम कोर्ट में परिवाद (केस) दायर किया गया है।
KK Pathak | Bihar News | केके पाठक के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पूर्व सीएम राबड़ी देवी घेरती नजर आ रही हैं
जानकारी के अनुसार, केके पाठक के बहाने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पूर्व सीएम राबड़ी देवी घेरती नजर आ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि केके पाठक का कोई अधिकार नहीं है कि किसी भी विश्वविद्यालय के वीसी को बुलाकर बैठक करें। वह अधिकार सिर्फ महामहिम राज्यपाल को होता है।
KK Pathak | Bihar News | केके पाठक बहुत ईमानदार हैं और वहीं वह मुख्यमंत्री के आदेश को ही नहीं मान रहे हैं
पूर्व सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री एक तरफ कहते हैं कि केके पाठक बहुत ईमानदार हैं और वहीं वह मुख्यमंत्री के आदेश को ही नहीं मान रहे हैं। उन्होंने जमकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा और साफ साफ कहा कि देखिए बिहार में कैसी सरकार है। सरकार के बातों को भी अफसर नहीं सुन रहे हैं।
KK Pathak | Bihar News | आप ही बताइए कि किस तरह की सरकार बिहार में नीतीश कुमार चला रहे हैं
आप ही बताइए कि किस तरह की सरकार बिहार में नीतीश कुमार चला रहे हैं। सत्ता पक्ष के विधायक भी बार-बार जिसकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं उनपर मुख्यमंत्री का बयान गलत है। सरकारी स्कूल के समय को लेकर बिहार में संग्राम छिड़ा हुआ है। केके पाठक ने सुबह 9 बजे शाम 5 तक स्कूल की घंटी निर्धारित की है।
KK Pathak | Bihar News | शिक्षा विभाग ने अब तक सीएम के नए आदेश को लेकर कोई पत्र जारी नहीं किया है
वहीं नीतीश कुमार ने सदन में दो दिन अपने बयान में कहा कि समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ही ठीक है। उसके बावजूद शिक्षा विभाग ने अब तक सीएम के नए आदेश को लेकर कोई पत्र जारी नहीं किया है। इसी बीच केके पाठक के एक वायरल वीडियो से हड़कंप मच गया है। इस वीडियो में वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान केके पाठक शिक्षकों को गाली देते नजर आ रहे हैं।
KK Pathak | Bihar News | अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ मुजफ्फरपुर जिले के सीजेएम कोर्ट में परिवाद (केस) दायर
इधर, बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ मुजफ्फरपुर जिले के सीजेएम कोर्ट में परिवाद (केस) दायर किया गया है। स्कूल में उपस्थिति को लेकर हाल में केके पाठक की ओर से दिए गए बयान से शिक्षकों में उबाल है।
KK Pathak | Bihar News | शिक्षकों के स्कूल टाइमिंग में कोई परिवर्तन नहीं किया
केके पाठक ने नीतीश कुमार की घोषणा के बावजूद शिक्षकों के स्कूल टाइमिंग में कोई परिवर्तन नहीं किया। समय को पूर्ववत रखा। उसे यथावत ही छोड़ दिया। वहीं, वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये अपना फरमान सुनाने के क्रम में अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए शिक्षकों के खिलाफ अपशब्द भी बोले।
KK Pathak | Bihar News | शिक्षकों का संघ काफी नाराज़ है, मामला कोर्ट पहुंच चुका है…
इस बात से शिक्षकों का संघ काफी नाराज़ है। नतीज़तन यह मामला अब कोर्ट पहुंच चुका है। शिक्षकों की भावनाएं आहत होने को लेकर विनोद कुमार ने अपने अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा के माध्यम से केके पाठक के खिलाफ परिवाद दायर किया है। उक्त मामले में सुनवाई 4 मार्च को होगी।
KK Pathak | Bihar News | धारा 504 और 506 के तहत कोर्ट में कार्रवाई की मांग
इस मामले में आईपीसी की धारा 504 और 506 के तहत कोर्ट में आईएएस के के पाठक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिसमे आरोप लगाया गया है कि बीते दिनों अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग के के पाठक की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी शिक्षकों को 9:15 में स्कूल में आने को लेकर अब मर्यादित टिप्पणी की गई थी, जिसको लेकर शिक्षकों की भावनाएं आहत हुई।
KK Pathak | Bihar News | 4 मार्च 2024 को सुनवाई की तिथि मुकर्रर
इस दौरान केके पाठक ने कई अपशब्दों का भी प्रयोग किया। इस बात को लेकर परिवादी विनोद कुमार ने अपने अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा के माध्यम से मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी की कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है। इसको कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 4 मार्च 2024 को सुनवाई की तिथि मुकर्रर की है। परिवाद में भारतीय दंड विधान आईपीसी की धारा 504 और 506 का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग कोर्ट से किया है।






