सतीश झा, बेनीपुर, देशज टाइम्स —बेनीपुर में बदली कई जिंदगियां, अब हर टोले में ‘ सरकार ‘, 6 राशन, 18 श्रम, 22 आधार कार्ड बने एक ही दिन में! आवेदन से सेवा तक। बेनीपुर विकास शिविर में क्या-क्या हुआ? पूरी डिटेल पढ़िए।
डॉ. अंबेडकर समग्र सेवा अभियान (Ambedkar Samagra Seva Abhiyan) के तहत बिहार सरकार की 22 विभिन्न योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बेनीपुर प्रखंड में विशेष शिविरों का आयोजन किया गया।






मुख्य बिंदु (Key Highlights)
09 पंचायतों में एकसाथ आयोजित हुआ शिविर।
- Advertisement -आवेदन प्राप्त कर शिविर पूर्व ही निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है।
मोबाइल नंबर लिंक न होने से आयुष्मान कार्ड में आ रही बाधा।
अधिकारियों द्वारा लाभुकों के बीच सीधी सेवा वितरण व्यवस्था।
हर शनिवार और बुधवार को लग रहे हैं विशेष विकास शिविर
अभियान के तहत प्रखंड के आधे पंचायतों में प्रत्येक शनिवार और बुधवार को विशेष विकास शिविर आयोजित हो रहे हैं। इन शिविरों में:
पूर्व में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन किया जाता है।
शिविर के दिन सेवाओं का प्रत्यक्ष वितरण होता है।
केवल छूटे हुए लाभुकों से नए आवेदन लिए जाते हैं।
बैंगनी महादलित टोल में शिविर का आयोजन
शनिवार को बेनीपुर प्रखंड के 09 पंचायतों के विभिन्न टोलों में शिविर आयोजित हुए।
अनुमंडल पदाधिकारी बेनीपुर द्वारा मकरमपुर पंचायत के महादलित टोल बैंगनी स्थित संस्कृत विद्यालय, बैंगनी में शिविर का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर कई लाभार्थियों को सरकारी सेवाओं का प्रत्यक्ष लाभ दिया गया।
शिविर में वितरित की गई प्रमुख सेवाएं
6 लाभुकों को नया राशन कार्ड (Ration Card) दिया गया।
18 लाभुकों को श्रम कार्ड (Labour Card) प्रदान किए गए।
2 बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) जारी किए गए।
22 लोगों के आधार कार्ड (Aadhaar Card) बनाए गए।
6 लोगों के आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) बनाए गए।
(मोबाइल लिंकिंग की कमी के कारण आयुष्मान कार्ड बनाने में कुछ कठिनाई आई।)
नए आवेदनों की स्थिति
46 नए आवेदन श्रम कार्ड के लिए आए।
26 नए आवेदन जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्राप्त हुए।
अन्य योजनाओं के लिए भी लाभुकों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए गए।
शिविर में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी
प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
अंचल अधिकारी (CO)
विकास मित्र
इन सभी अधिकारियों ने स्वयं अपने हाथों से लाभुकों को सेवा का लाभ प्रदान किया, जिससे शिविर में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ा।








