Bihar Promotion: बिहार के स्वास्थ्य महकमे में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भागलपुर स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMC) के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अजय प्रताप अपनी पदोन्नति को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं। मात्र चार महीने की अवधि में एक ही डॉक्टर को पहले सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी से वरीय चिकित्सा पदाधिकारी बना दिया गया और फिर इस पर सवाल उठने लगे।
डॉ. अजय प्रताप को सरकार ने सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी के तौर पर जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात किया था। हालांकि, तैनाती के महज चार महीने के भीतर ही बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के उन्हें वरीय चिकित्सा पदाधिकारी का पद दे दिया गया। इस अप्रत्याशित बदलाव ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है।






सरकारी अधिसूचना में उजागर हुई बड़ी विसंगति
इस पूरे मामले की पड़ताल में पंजीयन संख्या और सरकारी अधिसूचना में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। यह अनियमितता उजागर होने के बाद डॉ. अजय प्रताप की पदोन्नति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, ऐसी पदोन्नति के लिए स्पष्ट प्रक्रियाओं और अधिसूचनाओं का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसका इस मामले में अभाव दिखा है।
यह घटना Bihar Promotion नियमों में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक चूक को दर्शाती है। बिना किसी स्पष्टीकरण या नोटिफिकेशन के किसी अधिकारी की पदोन्नति से विभाग की विश्वसनीयता पर भी आंच आ सकती है।
गलती सुधारने के लिए मुख्यालय को दिया आवेदन
डॉ. अजय प्रताप ने स्वयं इस गलती को सुधारने के लिए मुख्यालय को आवेदन दिया है। पंजीयन संख्या और सरकारी अधिसूचना में उजागर हुई विसंगतियों को ठीक करने की मांग की गई है।
इस आवेदन से स्पष्ट होता है कि संबंधित डॉक्टर भी इस प्रशासनिक गड़बड़ी से अवगत हैं और इसे दुरुस्त करवाना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यालय इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस नीति बनाई जाती है। यह घटना स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है, जिसका समाधान जल्द से जल्द होना आवश्यक है ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।








